देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जनपद में गंभीर एवं जन्मजात बीमारियों से ग्रसित बच्चों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी बच्चा उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य से जिले में विशेष चिन्हीकरण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास विभाग को छह वर्ष तक की आयु के बच्चों तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी को छह से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों और किशोरों की पहचान के लिए विशेष अभियान संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जन्मजात या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों का समय पर चिन्हीकरण होने से उनके उपचार में तेजी लाई जा सकेगी।
डॉ. चौहान ने बताया कि चिन्हित बच्चों का इलाज भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत निशुल्क कराया जाएगा। जिन बीमारियों का उपचार इस योजना के अंतर्गत संभव नहीं होगा, उनके लिए अन्य उपलब्ध वित्तीय संसाधनों और राइफल फंड का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे का इलाज धन के अभाव में न रुके।
जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में बाल विकास विभाग ने अब तक छह वर्ष तक की आयु के 12 गंभीर रूप से बीमार बच्चों की पहचान कर ली है। इन बच्चों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और उपचार प्रक्रिया शुरू करने की कार्रवाई भी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की मदद से व्यापक सर्वेक्षण अभियान चलाया जाएगा। सर्वेक्षण के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान कर उनके मामलों को प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाया जाएगा।
डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास सुनिश्चित करें। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का कोई भी बच्चा स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे।