युवाओं को आचार्य रमेश सेमवाल का संदेश, श्रीराम और श्रीकृष्ण से लें जीवन की प्रेरणा

 रुड़की। ज्योतिष गुरुकुलम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने भारतीय संस्कृति, संस्कारों और युवा पीढ़ी की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक धारा है, जो मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग दिखाती है।

कथा के दौरान आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की मूल पहचान उसके संस्कार हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में संस्कारों को अपनाता है, तो वह न केवल स्वयं का बल्कि समाज और राष्ट्र का भी कल्याण कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है और उन्हें अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों की तपोभूमि है, जहां भगवान ने समय-समय पर अवतार लेकर धर्म की स्थापना की। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वनवास स्वीकार किया और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष किया। वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने सेवा, ज्ञान और कर्म का संदेश देकर मानव जीवन को नई दिशा दी।

आचार्य सेमवाल ने कहा कि हिंदू धर्म के पांच प्रमुख आधार गो, गंगा, गीता, गायत्री और गोपाल हैं। इन मूल्यों और प्रतीकों की रक्षा तथा सम्मान प्रत्येक सनातनी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि गंगा और गौ माता की सेवा, गीता के ज्ञान का अनुसरण और भारतीय परंपराओं का संरक्षण राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है और युवाओं को सत्य, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों के मार्ग पर चलकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहिए। कथा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर राधा भटनागर, चित्रा गोयल, सुलक्षणा सेमवाल, पूजा वर्मा, रितु वर्मा, रेनू शर्मा और अदिति सेमवाल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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