नई दिल्ली। भारत की सामरिक और रणनीतिक मजबूती को नई ऊंचाई देने वाली बहुप्रतीक्षित जोजिला टनल परियोजना ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली इस सुरंग का अंतिम ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इसके साथ ही देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल यह सुरंग अब अपने पूर्ण होने के करीब पहुंच गई है।
लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर निर्मित जोजिला टनल दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित महत्वपूर्ण सड़क सुरंगों में गिनी जा रही है। यह सुरंग गांदरबल जिले के बालटाल को लद्दाख के द्रास क्षेत्र से जोड़ेगी। इसके शुरू होने के बाद वर्तमान में कई घंटों का सफर महज 15 से 20 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
जोजिला दर्रा लंबे समय से कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच एकमात्र जमीनी संपर्क मार्ग रहा है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग कई महीनों तक बंद हो जाता है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ सेना की आवाजाही और रसद आपूर्ति भी प्रभावित होती है। नई सुरंग के निर्माण से पूरे वर्ष यानी ऑल वेदर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
रणनीतिक दृष्टि से यह परियोजना भारत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। सियाचिन ग्लेशियर, कारगिल और अन्य संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों तक हथियार, ईंधन और आवश्यक सामग्री पहुंचाने में अब काफी आसानी होगी। यही वजह है कि इसे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया जाता है।
इतिहास गवाह है कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर कारगिल युद्ध तक पाकिस्तान ने इस क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों का लाभ उठाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। लेकिन जोजिला टनल के निर्माण के बाद लद्दाख तक निर्बाध और तेज संपर्क संभव होगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सेना की प्रतिक्रिया क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की सामरिक ताकत, विकास और सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम है।