कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी असंतोष अब स्थानीय निकायों तक पहुंच गया है। कूचबिहार जिले की मेखलीगंज नगर पालिका में अध्यक्ष सहित पांच पार्षदों के कांग्रेस में शामिल होने से नगर निकाय की सत्ता टीएमसी के हाथों से निकलकर कांग्रेस के पास पहुंच गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 9 वार्डों वाली मेखलीगंज नगर पालिका में पहले टीएमसी का पूर्ण वर्चस्व था। नगर पालिका में टीएमसी के आठ और भाजपा का एक पार्षद था। लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष प्रभात पाटनी और पांच अन्य पार्षदों के कांग्रेस का दामन थामने के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नगर पालिका में बहुमत हासिल करने में सफल हो गई है।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रभात पाटनी ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में और भी पार्षद पार्टी बदल सकते हैं। उन्होंने बताया कि कोलकाता स्थित कांग्रेस कार्यालय में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। साथ ही दावा किया कि मेखलीगंज लौटने के बाद दो अन्य पार्षद भी कांग्रेस में शामिल होंगे।
टीएमसी छोड़ने के कारणों पर पाटनी ने कहा कि पार्टी आंतरिक गुटबाजी और संघर्षों में उलझी हुई है, जिसके कारण जनता के हित में काम करना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए कांग्रेस बेहतर मंच साबित होगी।
पाटनी ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ही केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेहड़ी-पटरी कारोबारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो रहा है और यह भविष्य में कांग्रेस के प्रमुख आंदोलनकारी मुद्दों में शामिल होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मेखलीगंज की यह घटना टीएमसी के लिए चिंता का विषय है और इससे राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों की नई तस्वीर सामने आ रही है।