Congress के ‘विश्वासघात’ से रूठी DMK : गठबंधन की राजनीति में उभरा नया ‘दक्षिण संकट’

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद 'विपक्षी एकजुटता' को लगा गहरा झटका : द्रमुक (DMK) ने कांग्रेस पर "विश्वासघात" का आरोप लगाते हुए 8 जून को दिल्ली में होने वाली 'INDIA' गठबंधन की उच्च स्तरीय बैठक का पूरी तरह बहिष्कार करने का एलान किया है...इसी भारी तनाव के बीच, कांग्रेस ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने सात दिग्गजों की सूची जारी कर दी है, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और आक्रामक प्रवक्ता पवन खेड़ा को कर्नाटक से मैदान में उतारा गया है...

ममता सिंह, नई दिल्ली।

विपक्षी एकजुटता के दावों के बीच राष्ट्रीय राजनीति का ऊंट अब एक नए करवट बैठता दिखाई दे रहा है। 8 जून को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने वाली विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रमुक (DMK) ने बहिष्कार का बिगुल फूंककर गठबंधन की अंदरूनी दरारों को उजागर कर दिया है। द्रमुक ने बेहद कड़े शब्दों में बयान जारी कर साफ किया है कि उसके कार्यकर्ता तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस द्वारा किए गएविश्वासघातसे गहरे आहत हैं, इसलिए वे ऐसी किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे जहां कांग्रेस मौजूद होगी। इस कड़वाहट की असल वजह हालिया चुनावों के नतीजे और उसके बाद के समीकरण हैं, जिसमें द्रमुक के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव जीतने वाली कांग्रेस ने नतीजों के बाद अचानक पाला बदल लिया।

कांग्रेस ने द्रविड़ महाशक्ति द्रमुक से 11 साल पुराना नाता तोड़कर सूबे की नई सत्ताधारी पार्टी टीवीके (TVK) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल होने का एकतरफा फैसला कर लिया। इसपीठ में छुरा घोंपनेवाली राजनीति से नाराज द्रमुक ने लोकसभा में भी अपने सांसदों की बैठने की व्यवस्था कांग्रेस से अलग करने की मांग की है। हालांकि, द्रमुक ने यह जरूर कहा है कि वह देशहित से जुड़े मुद्दों पर अन्य गैरकांग्रेसी विपक्षी दलों के साथ खड़ी रहेगी, लेकिन इस बहिष्कार ने ‘INDIA’ ब्लॉक के भविष्य और उसकी एकता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

इस क्षेत्रीय घमासान और बगावत के साए के बीच, कांग्रेस आलाकमान ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा के द्विवार्षिक और उपचुनावों के लिए अपने सात रणनीतिक चेहरों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी ने संतुलन साधने और संसद के उच्च सदन में अपनी तीखी आवाज को मजबूत करने की पूरी कोशिश की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को कर्नाटक से दोबारा उच्च सदन भेजने की तैयारी है, वहीं पार्टी के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा कर्नाटक से ही अपना राज्यसभा डेब्यू करने जा रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री के साथ हालिया राजनीतिक विवादों में रहे पवन खेड़ा को उच्च सदन में भेजना कांग्रेस की उस आक्रामक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह संसद के भीतर सरकार को घेरने के लिए प्रखर वक्ताओं की फौज तैयार करना चाहती है। कर्नाटक से खड़गे और खेड़ा के साथ मंसूर अली खान को टिकट दिया गया है, जबकि मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी और झारखंड से प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया गया है।

सबसे दिलचस्प नाम तमिलनाडु की इकलौती सीट पर प्रवीन चक्रवर्ती का है, जहां कांग्रेस ने द्रमुक के साथ जारी जंग के बीच अपना उम्मीदवार उतारकर यह संदेश दे दिया है कि वह दक्षिण की अपनी नई राजनीतिक जमीन को लेकर पूरी तरह गंभीर है। अब देखना यह है कि 8 जून की बैठक में कांग्रेस सहयोगियों की इस नाराजगी को कैसे संभालती है।

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