देहरादून/शिमला। उत्तराखंड के पर्यटन एवं लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने गुरुवार को शिमला स्थित लोक भवन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई, जिसमें यमुना नदी की सहायक टोंस नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय किशाऊ बांध परियोजना प्रमुख विषय रही।
बैठक के दौरान सतपाल महाराज ने किशाऊ बांध परियोजना के महत्व और उससे मिलने वाले संभावित लाभों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश दोनों राज्यों के लिए दीर्घकालिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। परियोजना के माध्यम से 1,324 मिलियन क्यूबिक मीटर जल भंडारण क्षमता विकसित होगी, जिससे लगभग 97 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई संभव हो सकेगी।
महाराज ने बताया कि इस परियोजना से 617 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे भविष्य में जल संकट की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही परियोजना के तहत 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का भी लक्ष्य रखा गया है, जो क्षेत्र की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध के निर्माण से उत्तराखंड को उत्पादित विद्युत का निर्धारित हिस्सा प्राप्त होगा। इससे राज्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही देहरादून और आसपास के कृषि क्षेत्रों को अतिरिक्त सिंचाई जल उपलब्ध होने से किसानों को भी लाभ पहुंचेगा।
सतपाल महाराज ने बताया कि परियोजना के निर्माण से उत्तराखंड की लगभग 1452 हेक्टेयर और हिमाचल प्रदेश की करीब 1498 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होगी। ऐसे में परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर दोनों राज्यों के बीच समन्वय और संवाद आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशाऊ बांध परियोजना उत्तर भारत की महत्वपूर्ण जल, ऊर्जा और सिंचाई परियोजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने से क्षेत्रीय विकास को गति मिलने के साथ-साथ दोनों राज्यों की आधारभूत संरचना और संसाधन प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।