देहरादून। उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कण्णन सी. एस. वारियर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित “एडिटर ऑफ डिस्टिंक्शन अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रकाशन संस्था स्प्रिंगर नेचर द्वारा जर्नल संपादन और वैज्ञानिक गुणवत्ता को बढ़ाने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
डॉ. वारियर वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर केरल वन अनुसंधान संस्थान (केएफआरआई), पीची, त्रिशूर के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान और अकादमिक प्रकाशन के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है। स्प्रिंगर नेचर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रकाशकों में शामिल है और उसके द्वारा दिया गया यह पुरस्कार शोध एवं संपादन क्षेत्र में उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है।
डॉ. वारियर “एग्रोफॉरेस्ट्री सिस्टम्स” नामक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के एसोसिएट एडिटर हैं। यह जर्नल विश्व के शीर्ष 10 वानिकी अनुसंधान जर्नलों में शामिल है। इस प्रतिष्ठित जर्नल के संपादकीय बोर्ड में 32 देशों के 66 विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें केवल पांच भारतीय वैज्ञानिकों को स्थान मिला है। ऐसे में डॉ. वारियर का यह सम्मान भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
उन्होंने वानिकी अनुसंधान के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय योगदान दिए हैं। इससे पहले उन्हें कैसुरिना की लवण-सहिष्णु तीन क्लोनों के विकास से जुड़े शोध कार्य के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा केरल के पवित्र उपवनों पर किए गए उत्कृष्ट अध्ययन के लिए उन्हें रोला एस. राव राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
डॉ. वारियर का VIDWAN स्कोर 10 में से 10 है, जो उनकी शोध क्षमता और अकादमिक योगदान को दर्शाता है। उन्होंने वानिकी क्षेत्र में भारत के चुनिंदा पेटेंट धारकों में स्थान बनाते हुए एक महत्वपूर्ण पेटेंट भी हासिल किया है।
उनकी इस उपलब्धि से देहरादून, उत्तराखंड और देश के वैज्ञानिक समुदाय में खुशी का माहौल है। यह सम्मान युवा शोधकर्ताओं को भी विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगा।