पुणे शराब त्रासदी: मौत का आंकड़ा 15 पार, CM ने दिए जांच के आदेश
मेथनॉल का कालचक्र : पुणे जिले के कई इलाकों में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 से अधिक हुई, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिए सघन जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई के आदेशमहाराष्ट्र के पुणे जिले से सामने आई जहरीली शराब की त्रासदी ने अब एक बेहद भयावह रूप अख्तियार कर लिया है, जिससे पूरे सूबे के शासन और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ताजा अपडेट के मुताबिक, जिले के अलग-अलग रिहायशी इलाकों में कथित तौर पर जहरीली शराब के सेवन से जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 15 के पार पहुंच चुका है। बीते 48 घंटों के भीतर हुई इन ताबड़तोड़ मौतों ने कानून-व्यवस्था और अवैध शराब माफियाओं के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की भयावहता और संवेदनशीलता को देखते हुए पुणे शहर तथा पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस की विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से अपराधियों के खिलाफ एक व्यापक धरपकड़ अभियान शुरू किया है। इस दुखद घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और पूरे अवैध शराब नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी किए हैं। सघन जांच के शुरुआती दौर में पुलिस और आबकारी विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य संदिग्ध योगेश वानखेड़े ने खुद को कानून के शिकंजे से घिरता देख आबकारी विभाग के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसे बाद में पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इसी मुख्य आरोपी ने प्रभावित बस्तियों में शराब की घातक खेप सप्लाई की थी। पुलिस उपायुक्त (जोन 1) संदीप अटोले के मुताबिक, पिंपरी-चिंचवाड़ के फुगेवाड़ी और दापोड़ी जैसे इलाकों में मेथनॉल मिली हुई जहरीली शराब बांटने का सीधा लिंक मिला है। पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य सप्लायर सहित अब तक आठ आरोपियों को कस्टडी में लिया जा चुका है। फुगेवाड़ी और दापोड़ी में जब मौतों का सिलसिला अचानक तेज हुआ, तो पुलिस ने कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। इसके साथ ही पुणे के हडपसर और कालेपडल इलाकों से भी संदिग्ध मौतों के मामले सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि शराब पीने के कुछ ही समय बाद पीड़ितों को गंभीर उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत हुई थी। राज्य आबकारी आयुक्त अतुल कनाडे ने साफ किया है कि प्राथमिक जांच में शराब के भीतर केमिकल (मेथनॉल) मिलाए जाने का गहरा अंदेशा है, जिसे पुख्ता करने के लिए विसरा और जब्त सामग्री को फॉरेन्सिक लैब भेजा गया है। फिलहाल, पुलिस पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर इस पूरे जहरीले कारोबार की सप्लाई चेन को ध्वस्त करने में जुटी है।महाराष्ट्र के पुणे जिले से सामने आई जहरीली शराब की त्रासदी ने अब एक बेहद भयावह रूप अख्तियार कर लिया है, जिससे पूरे सूबे के शासन और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ताजा अपडेट के मुताबिक, जिले के अलग-अलग रिहायशी इलाकों में कथित तौर पर जहरीली शराब के सेवन से जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 15 के पार पहुंच चुका है। बीते 48 घंटों के भीतर हुई इन ताबड़तोड़ मौतों ने कानून-व्यवस्था और अवैध शराब माफियाओं के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की भयावहता और संवेदनशीलता को देखते हुए पुणे शहर तथा पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस की विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से अपराधियों के खिलाफ एक व्यापक धरपकड़ अभियान शुरू किया है। इस दुखद घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और पूरे अवैध शराब नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी किए हैं। सघन जांच के शुरुआती दौर में पुलिस और आबकारी विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य संदिग्ध योगेश वानखेड़े ने खुद को कानून के शिकंजे से घिरता देख आबकारी विभाग के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसे बाद में पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इसी मुख्य आरोपी ने प्रभावित बस्तियों में शराब की घातक खेप सप्लाई की थी। पुलिस उपायुक्त (जोन 1) संदीप अटोले के मुताबिक, पिंपरी-चिंचवाड़ के फुगेवाड़ी और दापोड़ी जैसे इलाकों में मेथनॉल मिली हुई जहरीली शराब बांटने का सीधा लिंक मिला है। पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य सप्लायर सहित अब तक आठ आरोपियों को कस्टडी में लिया जा चुका है। फुगेवाड़ी और दापोड़ी में जब मौतों का सिलसिला अचानक तेज हुआ, तो पुलिस ने कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। इसके साथ ही पुणे के हडपसर और कालेपडल इलाकों से भी संदिग्ध मौतों के मामले सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि शराब पीने के कुछ ही समय बाद पीड़ितों को गंभीर उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत हुई थी। राज्य आबकारी आयुक्त अतुल कनाडे ने साफ किया है कि प्राथमिक जांच में शराब के भीतर केमिकल (मेथनॉल) मिलाए जाने का गहरा अंदेशा है, जिसे पुख्ता करने के लिए विसरा और जब्त सामग्री को फॉरेन्सिक लैब भेजा गया है। फिलहाल, पुलिस पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर इस पूरे जहरीले कारोबार की सप्लाई चेन को ध्वस्त करने में जुटी है। मुख्य सप्लायर समेत 8 धरे गए...
चाणक्य मंत्र ब्यूरो।
मुंबई। पुणे जिले से सामने आई जहरीली शराब की त्रासदी ने अब एक बेहद भयावह रूप अख्तियार कर लिया है, जिससे पूरे सूबे के शासन और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ताजा अपडेट के मुताबिक, जिले के अलग-अलग रिहायशी इलाकों में कथित तौर पर जहरीली शराब के सेवन से जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 15 के पार पहुंच चुका है। बीते 48 घंटों के भीतर हुई इन ताबड़तोड़ मौतों ने कानून-व्यवस्था और अवैध शराब माफियाओं के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की भयावहता और संवेदनशीलता को देखते हुए पुणे शहर तथा पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस की विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से अपराधियों के खिलाफ एक व्यापक धरपकड़ अभियान शुरू किया है। इस दुखद घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और पूरे अवैध शराब नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी किए हैं।
सघन जांच के शुरुआती दौर में पुलिस और आबकारी विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य संदिग्ध योगेश वानखेड़े ने खुद को कानून के शिकंजे से घिरता देख आबकारी विभाग के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसे बाद में पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इसी मुख्य आरोपी ने प्रभावित बस्तियों में शराब की घातक खेप सप्लाई की थी।
पुलिस उपायुक्त (जोन 1) संदीप अटोले के मुताबिक, पिंपरी-चिंचवाड़ के फुगेवाड़ी और दापोड़ी जैसे इलाकों में मेथनॉल मिली हुई जहरीली शराब बांटने का सीधा लिंक मिला है। पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य सप्लायर सहित अब तक आठ आरोपियों को कस्टडी में लिया जा चुका है।
फुगेवाड़ी और दापोड़ी में जब मौतों का सिलसिला अचानक तेज हुआ, तो पुलिस ने कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। इसके साथ ही पुणे के हडपसर और कालेपडल इलाकों से भी संदिग्ध मौतों के मामले सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि शराब पीने के कुछ ही समय बाद पीड़ितों को गंभीर उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत हुई थी।
राज्य आबकारी आयुक्त अतुल कनाडे ने साफ किया है कि प्राथमिक जांच में शराब के भीतर केमिकल (मेथनॉल) मिलाए जाने का गहरा अंदेशा है, जिसे पुख्ता करने के लिए विसरा और जब्त सामग्री को फॉरेन्सिक लैब भेजा गया है। फिलहाल, पुलिस पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर इस पूरे जहरीले कारोबार की सप्लाई चेन को ध्वस्त करने में जुटी है।