देहरादून। Ganesh Godiyal ने Shri Badrinath-Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी ने धार्मिक संस्थाओं में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं और उनकी व्यवस्था संभालने वाली संस्था में इस तरह की नियुक्तियां और भुगतान गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि बीकेटीसी में “अंधा बांटे रेवड़ी, अपने-अपने को दे” जैसी स्थिति बन गई है।
गणेश गोदियाल ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह बीकेटीसी अध्यक्ष थे, तब उन्होंने कभी भी टीए/डीए या मानदेय के रूप में एक रुपया तक नहीं लिया। उनके अनुसार मंदिर समिति का पैसा श्रद्धालुओं के चढ़ावे का धन होता है, जिसका उपयोग केवल मंदिरों और चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीकेटीसी में पहले से पर्याप्त कर्मचारी होने के बावजूद निजी नियुक्तियां की गईं और शासनादेशों का उल्लंघन कर भत्तों का भुगतान किया गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा सरकार ने धार्मिक संस्थाओं को भी राजनीतिक संरक्षण और भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया है।
गोदियाल ने बीकेटीसी की ओर से कैश पेमेंट को लेकर दिए गए तर्क पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पूरी चारधाम यात्रा ऑनलाइन सिस्टम से संचालित हो रही है, तब डिजिटल भुगतान की सुविधा नहीं होने का दावा स्वीकार करना मुश्किल है। उन्होंने केदारनाथ मंदिर परिसर में पहले सामने आए क्यूआर कोड विवाद का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बीकेटीसी में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों पर मंदिर समिति का पैसा खर्च हुआ है, उनसे रिकवरी की जानी चाहिए।