SpaceX ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सबसे बड़े रॉकेट स्टारशिप के नए वर्जन V3 का सफल परीक्षण किया है। इस ऐतिहासिक टेस्ट के बाद NASA ने इसे चांद और मंगल मिशन की दिशा में बड़ा कदम बताया है। हालांकि परीक्षण के अंतिम चरण में रॉकेट समुद्र में उतरते समय विस्फोट के साथ नष्ट हो गया, लेकिन इसके बावजूद इसे बेहद सफल मिशन माना जा रहा है।
स्टारशिप का यह फ्लाइट-12 टेस्ट शनिवार को किया गया। नासा एडमिनिस्ट्रेटर जैरेड आइजैकमैन ने लॉन्च की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि यह अमेरिकी अंतरिक्ष अभियानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस परीक्षण से चंद्रमा और मंगल मिशनों को नई रफ्तार मिलेगी।
स्टारशिप V3 में कई महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव किए गए हैं। इसमें रॉकेट की विश्वसनीयता बढ़ाने, अधिक वजन ले जाने और दोबारा इस्तेमाल की क्षमता को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया गया है। यही तकनीक भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों, खासकर नासा के आर्टेमिस मिशन के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
नासा की योजना है कि स्टारशिप को ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम के रूप में इस्तेमाल किया जाए। आर्टेमिस-3 मिशन में इसी स्पेसक्राफ्ट के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाया जाएगा। लंबे समय बाद इंसानों को दोबारा चांद पर भेजने की तैयारी में जुटे नासा के लिए यह परीक्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस टेस्ट के दौरान हॉट स्टेजिंग, बूस्टर परफॉर्मेंस और ऑर्बिट ऑपरेशन जैसे कई जटिल लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। हालांकि अभी इंसानों के साथ इसकी उड़ान और पूरी रीयूजेबिलिटी बाकी है, लेकिन हर सफल परीक्षण के साथ स्टारशिप वास्तविक मिशनों के और करीब पहुंच रहा है।
नासा का मानना है कि अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल साबित होती है, तो भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसान भेजने का सपना भी साकार हो सकता है।