दलित उत्पीड़न मामलों में त्वरित कार्रवाई पर जोर, हिमाचल टीम ने सराहा उत्तराखंड मॉडल

देहरादून। उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के कार्यों और योजनाओं का अध्ययन करने के लिए हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग की टीम ने देहरादून स्थित आयोग कार्यालय का दौरा किया। डांडा धर्मपुर स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान दोनों राज्यों के आयोगों ने अनुसूचित जाति समाज के कल्याण, जागरूकता और त्वरित न्याय व्यवस्था को लेकर विचार-विमर्श किया।

हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार सहित आयोग के सदस्यों का उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने स्वागत किया। इस दौरान दोनों राज्यों के आयोगों के बीच कार्यप्रणाली और शिकायत निस्तारण प्रणाली को लेकर अनुभव साझा किए गए।

बैठक में कुलदीप कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही पहाड़ी राज्य हैं, इसलिए अनुसूचित जाति समाज से जुड़ी समस्याएं भी काफी हद तक समान हैं। उन्होंने हिमाचल सरकार द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाओं और आयोग की गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही उत्तराखंड आयोग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।

वहीं मुकेश कुमार ने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना है। उन्होंने बताया कि आयोग में अनुसूचित जाति उत्पीड़न, सामाजिक भेदभाव और भूमि विवाद से संबंधित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाता है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा एससी वर्ग के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी साझा की गई।

बैठक के दौरान अनुसूचित जाति समाज में जागरूकता बढ़ाने, अधिकारों की जानकारी पहुंचाने और पीड़ितों को न्याय प्रक्रिया से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। आयोग के अधिकारियों का मानना है कि समाज में जागरूकता बढ़ने से उत्पीड़न के मामलों में कमी लाई जा सकती है।

इस अवसर पर गीता खन्ना, भगवत मकवाना, कविता टम्टा, विशाल मुखिया, भागीरथी कुंजवाल और सुनीता देवी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

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