नई दिल्ली/देहरादून। Sahitya Akademi सभागार में आयोजित 19वें शीला सिद्धांतकर स्मृति सम्मान समारोह में साहित्य और कविता की संवेदनशील दुनिया का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। इस अवसर पर कवयित्री Sapna Bhatt को उनके कविता संग्रह ‘जो भाषा में नहीं है’ के लिए प्रतिष्ठित “शीला सिद्धांतकर स्मृति सम्मान” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में देशभर से साहित्यकारों, कवियों और संस्कृतिकर्मियों की उपस्थिति रही।
कवयित्री सपना भट्ट की अनुपस्थिति में उनकी पुत्री Anushka Bhatt ने सम्मान ग्रहण किया। सम्मान के तहत प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और सम्मान राशि का चेक प्रदान किया गया। इस दौरान अनुष्का भट्ट ने सपना भट्ट का लिखित वक्तव्य पढ़ा, जिसमें समकालीन कविता की स्थिति, उसकी रचना प्रक्रिया और कविता को केवल वक्तव्य में बदल देने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की गई। इसके बाद उन्होंने सपना भट्ट की कुछ चर्चित कविताओं का पाठ किया और अपनी रचनाएं भी प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध आलोचक Rameshwar Rai ने सपना भट्ट की कविताओं को कवि की निजता और आत्मसंघर्ष की गहरी अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं में भाषा, शिल्प और बिंबों की मौलिकता स्पष्ट दिखाई देती है, जो आज के समय में बेहद दुर्लभ है।
मुख्य अतिथि चर्चित कवयित्री Sukrita Paul Kumar ने सपना भट्ट की कविताओं में मौजूद करुणा और संवेदनशीलता की विशेष सराहना की। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे Narayan Kumar ने शीला सिद्धांतकर के व्यक्तित्व और संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए उनके योगदान को प्रेरणादायक बताया।
इस अवसर पर शीला सिद्धांतकर के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘समकालीन देशज पत्रिका’ के नवीनतम अंक का लोकार्पण भी हुआ।