क्या 2026 में आएगा ‘सुपर अल नीनो’? गर्मी और सूखे का खतरनाक संकेत

दुनिया भर के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जो अल नीनो के विकसित होने का अहम संकेत माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो 2026 तक एक “सुपर अल नीनो” बन सकता है, जिसका असर 2027 तक वैश्विक तापमान को नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, अल नीनो तब बनता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इससे हवा के प्रवाह में बदलाव आता है और दुनिया भर में मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ता है, जिससे कई क्षेत्रों में सूखा और भीषण गर्मी की स्थिति बन जाती है।

भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंताजनक मानी जा रही है। देश की खेती और जल संसाधन काफी हद तक मानसून पर निर्भर करते हैं। अनुमान है कि 2026 में उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में लंबे समय तक लू चल सकती है और बारिश सामान्य से कम हो सकती है। इससे फसलों की पैदावार घटने का खतरा है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई का दबाव आम लोगों पर पड़ेगा।

इसके अलावा, कम बारिश के कारण जलाशयों और भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है, जिससे जल संकट गहराने की आशंका है। जलवायु परिवर्तन पहले ही तापमान बढ़ा रहा है, ऐसे में अल नीनो का प्रभाव हालात को और गंभीर बना सकता है।

भारतीय मौसम विभाग के शुरुआती संकेत बताते हैं कि 2026 में मानसून सामान्य से कम, यानी औसत का लगभग 92 प्रतिशत रह सकता है। साथ ही, प्रशांत महासागर में खारेपन के बदलते स्तर इस खतरे को और बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अभी इसे “मेगा अल नीनो” कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन हालात को देखते हुए तैयारी जरूरी है। बेहतर जल प्रबंधन, हीट एक्शन प्लान और किसानों के लिए मजबूत सहायता प्रणाली ही इस संभावित संकट से निपटने का प्रभावी तरीका हो सकता है।

 

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