बच्चों की सेहत और उनका भविष्य काफी हद तक उनके खानपान पर निर्भर करता है। संतुलित और पौष्टिक आहार जहां उनके शारीरिक और मानसिक विकास को मजबूत बनाता है, वहीं गलत खानपान उनकी सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। आजकल बच्चों में पिज्जा, बर्गर, चिप्स, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक जैसे जंक फूड का चलन तेजी से बढ़ा है, जो स्वाद में भले ही लुभावने लगते हों, लेकिन पोषण के मामले में बेहद कमजोर होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंक फूड में जरूरी विटामिन, मिनरल और फाइबर की कमी होती है, जबकि इनमें अधिक मात्रा में नमक, चीनी और अस्वस्थ वसा मौजूद होते हैं। लगातार इनके सेवन से बच्चों में मोटापा, कमजोरी, एकाग्रता में कमी और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर न केवल उनके शरीर पर, बल्कि उनकी पढ़ाई और मानसिक क्षमता पर भी पड़ता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों के आहार में नमक, चीनी और तेल की मात्रा सीमित होनी चाहिए। एक दिन में 5 ग्राम से ज्यादा नमक, 20-25 ग्राम से अधिक चीनी और 25-30 ग्राम से ज्यादा तेल का सेवन नुकसानदायक हो सकता है। खासतौर पर दो साल से कम उम्र के बच्चों को नमक और चीनी से दूर रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह उनके शरीर के अंगों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
हालांकि, बच्चों को स्वाद से पूरी तरह वंचित करना भी सही नहीं है। जरूरी है कि उन्हें जंक फूड के बजाय हेल्दी और टेस्टी विकल्प दिए जाएं। जैसे ताजे फल, सूखे मेवे, भुने चने, मूंगफली, मुरमुरा, घर की बनी लस्सी, शिकंजी या बिना चीनी का ताजा जूस। इसके अलावा रागी के लड्डू और घर की चटनियां भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बचपन से ही बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदतें विकसित की जाएं, तो वे जीवनभर फिट और स्वस्थ रह सकते हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की डाइट पर ध्यान दें और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन दें।