क्या बढ़ती आबादी ने सांसदों को बना दिया ‘असहाय’? Amit Shah का बड़ा सवाल

नई दिल्ली (ईएमएस)। संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर जारी बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने लोकसभा में विपक्ष पर तीखा निशाना साधते हुए कई अहम सवाल उठाए। ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में एक सांसद के लिए अपने क्षेत्र के सभी मतदाताओं तक प्रभावी तरीके से पहुंचना बेहद कठिन होता जा रहा है।

शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में 127 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मतदाताओं की संख्या 20 लाख से अधिक है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी आबादी के बीच एक सांसद कैसे सभी लोगों तक अपनी पहुंच सुनिश्चित कर सकता है। उनके अनुसार, परिसीमन का मुख्य उद्देश्य प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाना है, ताकि लोकतंत्र और मजबूत हो सके।

गृह मंत्री ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो राजनीतिक दल परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सीटों की बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के प्रावधानों के तहत परिसीमन के माध्यम से ही इन वर्गों के लिए सीटों का पुनर्निर्धारण संभव होता है।

इतिहास का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि 1970 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi की सरकार ने सीटों की संख्या बढ़ाने के बाद परिसीमन प्रक्रिया को फ्रीज कर दिया था। उन्होंने बताया कि 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए इस पर रोक लगा दी गई थी, जिससे जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व लंबे समय तक प्रभावित रहा।

जाति जनगणना के मुद्दे पर भी शाह ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही इसका टाइम-टेबल घोषित कर चुकी है और प्रक्रिया का पहला चरण शुरू हो चुका है। ऐसे में विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

संसद में इस बयान के बाद परिसीमन को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच टकराव तेज होता दिख रहा है।

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