नई दिल्ली। लोकसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं को अधिकार देने का विरोध करने वालों को इतिहास ने कभी माफ नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण बिल को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह देश की नारी शक्ति के अधिकारों से जुड़ा विषय है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग इस बिल में राजनीतिक स्वार्थ तलाश रहे हैं, लेकिन अगर विपक्ष इसका विरोध करता है तो राजनीतिक लाभ स्वाभाविक रूप से उन्हें मिलेगा, जबकि समर्थन करने पर यह श्रेय सबको साझा रूप से मिलेगा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि उन्हें किसी प्रकार का क्रेडिट नहीं चाहिए—“बिल पास होने के बाद मैं खुद विज्ञापन देकर सभी नेताओं का धन्यवाद करने को तैयार हूं, सबकी फोटो छपवा दूंगा, आप क्रेडिट ले लीजिए।”
इस दौरान समाजवादी पार्टी के नेता Akhilesh Yadav ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा नारी को केवल नारे के रूप में इस्तेमाल कर रही है और जो अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त स्थान नहीं देती, वह उनके सम्मान की बात कैसे कर सकती है।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जब नीयत साफ होती है तो शब्दों के खेल की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे “गारंटी” हो, “वादा” हो या किसी अन्य भाषा का शब्द—उनका उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना है।
इसके साथ ही उन्होंने द्रमुक (DMK) पर बिना नाम लिए कटाक्ष करते हुए कहा कि जैसे अच्छे काम में नजर न लगे, इसके लिए काला टीका लगाया जाता है, वैसे ही विपक्ष का विरोध इस बिल के लिए शुभ संकेत है। उल्लेखनीय है कि डीएमके सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे थे।
अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ‘मैं और तुम’ का विषय नहीं है, बल्कि देश की महिलाओं को उनका हक देने का अवसर है, जिसे दशकों से टाला गया। अब समय है कि इस ऐतिहासिक गलती का प्रायश्चित किया जाए।