देहरादून। सुबह की पहली किरण से पहले, जब दुनिया अभी सो रही होती है, तब मुस्कान बिष्ट अपने सपनों को मुक्कों में ढाल रही होती है। ठंडी हवा के बीच रिंग में उतरते ही उसके हर पंच के साथ एक एहसास जुड़ा होता है। कम उम्र में पिता को खो देने का दर्द मुस्कान की कमजोरी नहीं, उसकी ताकत बन गया।
सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में 10वीं की छात्रा मुस्कान का हर दिन अनुशासन से भरा होता है। सुबह बॉक्सिंग अभ्यास, फिर स्कूल और पढ़ाई, और शाम को दोबारा रिंग में कड़ी मेहनत। इसी लगन का नतीजा है कि उसने CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में 95.6 प्रतिशत अंक हासिल कर सबको चौंका दिया। रिजल्ट देखकर मां की आंखें नम हो गईं। बॉक्सिंग में 5 गोल्ड और 2 सिल्वर मेडल जीत चुकी मुस्कान अब भारतीय वायुसेना में जाने का सपना देख रही है। उसकी कहानी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हर दर्द जीत में बदल सकता है। मुस्कान की मां कमला बिष्ट, जो राज्य कर विभाग में वरिष्ठ अधिकारी हैं, ने अकेले ही बेटी को संभाला। दिनभर की नौकरी और घर की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने मुस्कान के हौसले को कभी टूटने नहीं दिया। मां का यही संघर्ष मुस्कान की प्रेरणा बन गया।