NCERT विवाद: कोर्ट में पहुंचे लेखक, क्या बदलेगा न्यायपालिका पर लिखा पाठ?

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से जुड़ी सामग्री को लेकर जारी विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। इस अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले शिक्षाविद—मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपना पक्ष रखा है।

सुनवाई के दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम निर्माण किसी एक व्यक्ति का निर्णय नहीं होता, बल्कि यह एक व्यापक और सामूहिक प्रक्रिया का परिणाम होता है। उन्होंने कहा कि इस कार्य में कई स्तरों पर समीक्षा और विचार-विमर्श शामिल रहता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि इन शिक्षाविदों की साख पर सवाल उठाना उचित नहीं है, क्योंकि वे अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित और अनुभवी हैं।

आलोक प्रसन्न कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अदालत की पिछली टिप्पणियों से उनके मुवक्किल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लेखक स्वयं विधि क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और उनका उद्देश्य नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण सामग्री तैयार करना था, न कि न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करना।

वहीं, सुपर्णा दिवाकर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे साई दीपक ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया टीम वर्क का परिणाम थी।

गौरतलब है कि 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्यों को इन विशेषज्ञों से दूरी बनाने और उन्हें सार्वजनिक जिम्मेदारियों से अलग करने का निर्देश दिया था। अदालत ने आशंका जताई थी कि पाठ्य सामग्री के जरिए न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जिसमें पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा, पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और प्रकाश सिंह शामिल हैं। यह समिति राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के साथ मिलकर समीक्षा करेगी।

फिलहाल, विवादित सामग्री पर रोक लगा दी गई है और एनसीईआरटी निदेशक पहले ही माफी मांग चुके हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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