देहरादून। जिले में एलपीजी गैस की आपूर्ति, वितरण और बढ़ते बैकलॉग को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला प्रशासन की क्यूआरटी टीम, गैस एजेंसियों के संचालक, तेल कंपनियों के अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमितता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि अब गैस एजेंसियों पर अधिकारियों की तैनाती की गई है, जो होम डिलीवरी व्यवस्था और एजेंसी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखेंगे।
तेल कंपनियों के अधिकारियों ने बढ़ते बैकलॉग के पीछे तकनीकी कारण बताते हुए कहा कि कुछ दिनों तक बुकिंग सॉफ्टवेयर में समस्या आने के कारण मैन्युअल रजिस्टर के माध्यम से गैस वितरण किया गया, जिसकी प्रविष्टियां अब तक सिस्टम में अपडेट नहीं हो सकी हैं। इस पर जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए कि सभी लंबित मैन्युअल प्रविष्टियों को उसी दिन सॉफ्टवेयर में दर्ज कराकर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन की बुकिंग अवधि से जुड़े आंकड़ों को अलग-अलग दर्शाने के निर्देश भी दिए गए।
सबसे सख्त निर्देश अवैध सिलेंडर कारोबार को लेकर दिए गए। जिलाधिकारी ने उत्तराखंड पुलिस के नगर पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया कि छापेमारी के दौरान बरामद अवैध सिलेंडरों का स्रोत पता लगाया जाए और संबंधित गैस एजेंसी की पहचान कर एजेंसी संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए उसे जेल भेजा जाए।
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि गैस एजेंसियों या तेल कंपनियों द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराना और कालाबाजारी पर पूरी तरह अंकुश लगाना है।