नई दिल्ली, बाल विवाह के खिलाफ देशभर में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से निकली **‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ यात्रा** का समापन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हुआ। यह अभियान पूरे देश में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म करने के लिए चलाया गया था।
पिछले एक महीने में इस रथ ने लगभग **6,79,077 किलोमीटर** की यात्रा करते हुए **28 राज्यों के 439 जिलों और 66,344 गांवों** तक पहुंच बनाई। इस दौरान करीब **5 करोड़ 22 लाख से अधिक लोगों** को बाल विवाह के दुष्प्रभावों और इससे जुड़े कानूनों के बारे में जागरूक किया गया।
बाल अधिकार और संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत नागरिक समाज संगठन **जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC)** ने केंद्र सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान को मजबूत करने के लिए देशभर में **500 से अधिक बाल विवाह मुक्ति रथ** सड़कों पर उतारे। इन रथों के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह के सामाजिक और कानूनी परिणामों के बारे में बताया गया, खासतौर पर लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया गया।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सीनियर एडवाइजर (पॉलिसी) **ज्योति माथुर** ने कहा कि यह रथ सिर्फ एक प्रतीक नहीं बल्कि न्याय और जागरूकता का वाहक है। इसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक कानून, सुरक्षा और जवाबदेही का संदेश पहुंचाना है ताकि सरकार की मंशा जमीनी स्तर पर वास्तविक सुरक्षा में बदल सके।
उन्होंने बताया कि इस अभियान में राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और बाल विवाह से प्रभावित महिलाएं भी सक्रिय रूप से शामिल हुईं। विशेष रूप से जमीनी स्तर की महिला नेतृत्व की भागीदारी ने इस अभियान को और प्रभावी बनाया।
ज्योति माथुर ने बताया कि सहयोगी संगठनों, स्थानीय प्रशासन और समुदायों के संयुक्त प्रयास से पिछले एक वर्ष में **देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रुकवाने में सफलता मिली है**।
गौरतलब है कि ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक वर्ष पूरा होने पर यह यात्रा शुरू की गई थी। पोस्टर, प्रभावशाली नारों और लाउडस्पीकर से सुसज्जित इन रथों ने शहरों से लेकर दूरदराज के गांवों तक लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई और इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूकता का मजबूत संदेश दिया।