दिल्ली/देहरादून। साक्षरता व्यक्ति को केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसमें सोचने-समझने की क्षमता विकसित करने के साथ अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने का काम करती है। साक्षर और शिक्षित समाज ही जागरूक, सक्षम और आत्मनिर्भर समाज की मजबूत नींव रख सकता है। यह बात उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह-2026 में कही।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. रावत ने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने की उपलब्धि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ‘उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ को जनआंदोलन का रूप देते हुए प्रत्येक नागरिक तक शिक्षा और साक्षरता की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में कार्य किया।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने भी उत्तराखंड की इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राज्य ने साक्षरता अभियान को जनभागीदारी से आगे बढ़ाया। शिक्षकों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों ने यह साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ भौगोलिक चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है।
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड अब पूर्ण साक्षर राज्य बनने के बाद शिक्षा के अगले चरण की ओर बढ़ रहा है। सरकार का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और आजीवन सीखने की संस्कृति को मजबूत करने पर है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में तकनीकी ज्ञान और आधुनिक शिक्षा को आम नागरिकों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि साक्षरता का लाभ व्यापक सामाजिक और आर्थिक विकास में दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि साक्षरता व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उसे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। समारोह में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. मानिक साहा, मिजोरम के शिक्षा मंत्री डॉ. वनलालथलाना, सिक्किम के शिक्षा मंत्री राजू बस्नेत, हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और शिक्षा मंत्रालय के सचिव टी.के. अनिल कुमार समेत विभिन्न राज्यों के मंत्री एवं अधिकारी मौजूद रहे।