राज्यपाल ने किया ‘वसंतोत्सव-2026’ का शुभारंभ, 2300 से अधिक प्रतिभागियों ने बढ़ाई रंगत

देहरादून स्थित लोक भवन परिसर में शुक्रवार को रंग-बिरंगे फूलों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और उत्साह से भरे माहौल के बीच ‘वसंतोत्सव-2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन Gurmit Singh (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल), राज्यपाल उत्तराखण्ड ने किया। इस अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री Ganesh Joshi, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री Satpal Maharaj तथा प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर भी उपस्थित रहीं।

उद्घाटन के साथ ही लोक भवन परिसर उत्सवमय वातावरण में बदल गया। विभिन्न प्रजातियों के फूलों से सजी प्रदर्शनी ने आगंतुकों को आकर्षित किया। इस वर्ष वसंतोत्सव की थीम “फ्लोरल हीलिंग: नेचर्स पाथ टू वेल बीइंग” रखी गई है, जिसके माध्यम से प्रकृति की उपचारात्मक शक्ति और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य में फूलों की भूमिका को रेखांकित किया गया। उद्यान विभाग द्वारा फ्लोरल हीलिंग पर आधारित विशेष स्टॉल लगाए गए, जहां हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले ताजे पुष्पों से तैयार खाद्य पदार्थों का भी प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने India Post द्वारा “भोज पत्र” विषय पर जारी विशेष डाक आवरण का विमोचन किया तथा डाक विभाग, देहरादून द्वारा आयोजित डाक टिकट प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में विभिन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विषयों पर आधारित आकर्षक डाक टिकट प्रदर्शित किए गए, जिन्होंने दर्शकों का ध्यान खींचा। राज्यपाल ने इसे उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षण बताया।

पहले दिन राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान, देहरादून और निरामया योगम रिसर्च फाउंडेशन, हरिद्वार द्वारा रिदमिक योग की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। इसके अलावा वुशु एसोसिएशन, उत्तराखण्ड के बच्चों ने शानदार मार्शल आर्ट करतब दिखाकर तालियां बटोरीं।

पेंटिंग प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के 738 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। बच्चों के उत्साह और रचनात्मकता को देखकर राज्यपाल ने उनका उत्साहवर्धन किया और उनकी कलाकृतियों की सराहना की। उन्होंने पुष्प प्रदर्शनी एवं विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर प्रदर्शकों से जानकारी भी प्राप्त की।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि वसंतोत्सव केवल पुष्प प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और नवाचार का संगम है। उन्होंने प्रगतिशील किसानों और उद्यान विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पुष्प उत्पादन और बागवानी राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। इससे स्वरोजगार और आय के नए अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने ‘अरोमा क्रांति’ का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की प्राकृतिक संपदा से तैयार सुगंधित उत्पाद वैश्विक बाजार में विशेष पहचान बना सकते हैं। फूलों और अरोमा उत्पादों के स्वास्थ्यवर्धक प्रभावों पर हो रहे अनुसंधान राज्य के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रहे हैं।

वसंतोत्सव में युवाओं, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। शहद, अरोमा उत्पाद और मिलेट्स जैसे पारंपरिक उत्पादों को आर्थिक प्रगति का आधार बताते हुए राज्यपाल ने तकनीक और डिजिटलीकरण से इन्हें जोड़ने पर जोर दिया।

प्रतियोगिताओं में कुल 15 श्रेणियों की 55 उप-श्रेणियों में 2314 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कट फ्लावर (पारंपरिक) में 870, गैर पारंपरिक में 266, दिव्यांग श्रेणी में 5, महिला पुष्प उत्पादक 26, पॉटेड प्लांट (प्राइवेट नर्सरी) 21, लूज फ्लावर 45, सब्जी उत्पादन 60, शहद श्रेणी 103 सहित अनेक वर्गों में उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।

निर्णायक मंडल के निर्णय के बाद प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार 1 मार्च 2026 को प्रदान किए जाएंगे। राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से परिवार सहित वसंतोत्सव में सहभागिता करने का आह्वान किया और इसे प्रकृति के साथ जुड़ने का अनूठा अवसर बताया।

 

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