बंगाल के ‘राजनीति के चाणक्य’ मुकुल रॉय नहीं रहे: टीएमसी से भाजपा और फिर वापसी तक का सफर

पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता और ‘राजनीति के चाणक्य’ के रूप में चर्चित Mukul Roy का सोमवार तड़के निधन हो गया। वह लंबे समय से कोमा में थे और सॉल्टलेक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। 23 फरवरी की रात करीब डेढ़ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन के समय उनकी उम्र 72 वर्ष थी। परिवार की ओर से यह दुखद समाचार साझा किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई।

उनके पुत्र शुभ्रांशु रॉय ने भावुक शब्दों में कहा कि उनके पिता ने जीवन में कई राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्ष जीते, लेकिन इस अंतिम लड़ाई में वह हार गए।

### तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार

1998 में All India Trinamool Congress की स्थापना के समय मुकुल रॉय प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल थे। संगठन को खड़ा करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क तैयार करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। करीब दो दशकों तक उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में जिम्मेदारी निभाई और चुनावी रणनीति के ‘मास्टरमाइंड’ के तौर पर पहचान बनाई।

राजनीतिक गलियारों में उन्हें ‘चाणक्य’ की उपाधि यूं ही नहीं मिली थी। बूथ स्तर की रणनीति से लेकर गठबंधन समीकरण तक, उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती थी।

### केंद्र की राजनीति में प्रभाव

यूपीए सरकार के दौरान मुकुल रॉय ने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने लगभग छह महीने तक रेल मंत्री का पद संभाला और करीब तीन वर्ष तक जहाजरानी एवं बंदरगाह राज्य मंत्री रहे।

2012 में रेल बजट को लेकर वह राष्ट्रीय चर्चा में आए। उस समय यात्री किराया वृद्धि पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने नाराजगी जताई थी। तत्कालीन रेल मंत्री Dinesh Trivedi के इस्तीफे के बाद मुकुल रॉय को रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने किराया वृद्धि को वापस ले लिया, जिसके चलते उन्हें विपक्ष और अर्थशास्त्रियों की आलोचना का सामना करना पड़ा।

### टीएमसी से अलगाव और भाजपा में प्रवेश

वर्ष 2017 में आंतरिक मतभेदों और विवादों के बाद मुकुल रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने Bharatiya Janata Party का दामन थामा। भाजपा में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। 11 अक्टूबर 2017 को उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था।

### घर वापसी और कानूनी पेच

11 जून 2021 को मुकुल रॉय ने अपने पुत्र के साथ ममता बनर्जी की मौजूदगी में टीएमसी में वापसी की। उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा की लोक लेखा समिति (PAC) का सदस्य और बाद में अध्यक्ष बनाया गया।

हालांकि 2022 में उनके वकील द्वारा यह दावा किए जाने के बाद कि वह अभी भी भाजपा में हैं, दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें अंतरिम राहत भी मिली।

### राजनीतिक विरासत

करीब तीन दशकों के लंबे राजनीतिक सफर में मुकुल रॉय ने बंगाल की राजनीति को कई मोड़ों पर प्रभावित किया। संगठन निर्माण, रणनीति और सत्ता संतुलन में उनकी भूमिका निर्णायक रही।

उनके निधन के साथ ही बंगाल की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। समर्थक और विरोधी—दोनों उन्हें एक कुशल रणनीतिकार और प्रभावशाली संगठनकर्ता के रूप में याद करेंगे।

 

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