देहरादून। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर **दून विश्वविद्यालय** के रंगमंच एवं लोक कला प्रदर्शन विभाग द्वारा एक गरिमामय एवं साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गढ़वाली और कुमाऊनी जैसी समृद्ध लोकभाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
विश्वविद्यालय की कुलपति **प्रो. सुरेखा डंगवाल** ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारी लोकभाषाएँ हमारी संस्कृति की जननी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त बनाना है, तो लोकभाषाओं के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मातृभाषा को दैनिक जीवन और अकादमिक गतिविधियों में अधिक से अधिक प्रयोग करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में गढ़वाली और कुमाऊनी भाषा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने गीत, कविताएँ और भाषण प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व और सांस्कृतिक जुड़ाव स्पष्ट झलक रहा था। विद्यार्थियों ने अपनी भाषाई और सांस्कृतिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि लोकभाषाएँ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान और परंपरा की आधारशिला हैं।
कार्यक्रम में प्रो. एच.सी. पुरोहित, प्रो. हर्ष डोभाल, प्रो. अजय सिंह, प्रो. चेतना पोखरियाल, ममता पांडे, अनूप सिंह, डॉ. अजीत पंवार, डॉ. कैलाश कंडवाल और डॉ. मानवेंद्र बर्तवाल सहित अनेक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। पूरा वातावरण सांस्कृतिक चेतना और भावनात्मक अभिव्यक्ति से परिपूर्ण रहा।