कोलकाता, Election Commission of India ने West Bengal में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान प्राप्त पहचान दस्तावेजों को अपलोड करने में कथित रूप से जानबूझकर देरी करने वाले अधिकारियों की पहचान की है। इस कार्रवाई से राज्य के निर्वाचन तंत्र में हलचल मच गई है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, लगभग 120 से 150 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) इस मामले में दोषी पाए गए हैं। हालांकि आयोग की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से दोषी अधिकारियों की अंतिम संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
सूत्रों ने बताया कि 14 फरवरी को सुनवाई सत्रों की बढ़ाई गई अंतिम तिथि समाप्त होने के बावजूद कुछ अधिकारियों ने पांच दिनों तक दस्तावेज अपलोड की प्रक्रिया लंबित रखी। इसके कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के पहचान दस्तावेज अभी तक प्रणाली में दर्ज नहीं हो सके हैं। जब तक इन दस्तावेजों का विधिवत अपलोड और पंजीकरण नहीं होगा, तब तक उनकी जांच प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती।
इस स्थिति ने 21 फरवरी तक दस्तावेजों की जांच पूरी करने की निर्धारित समयसीमा पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि जांच की समयसीमा बढ़ानी पड़ी, तो 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की प्रस्तावित तिथि भी आगे बढ़ाई जा सकती है।
आयोग ने संकेत दिया है कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, नौ सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, एक डेटा एंट्री ऑपरेटर तथा तीन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है।
निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आयोग की यह सख्ती अहम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे संभव हैं।