ब्रह्माकुमारीज मीडिया विंग के स्तंभ रहे राजयोगी बीके करमचंद, मोहाली में अंतिम विदाई

देहरादून/मोहाली  ब्रह्माकुमारीज की मीडिया विंग के सक्रिय स्तंभ और राजयोगी बीके करमचंद का 17 फरवरी की शाम 5:45 बजे निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। पहले उनका उपचार फोर्टिस अस्पताल में कराया गया, जहां दवा परिवर्तन के बाद थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर 13 फरवरी को उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। दो दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद चिकित्सकों के प्रयास सफल नहीं हो सके।

7 दिसंबर 1948 को हरियाणा में जन्मे करमचंद भाई को अगस्त 1969 में ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति हुई। 1972 से उन्होंने स्वयं को पूर्ण रूप से ईश्वरीय सेवाओं के लिए समर्पित कर दिया। चंडीगढ़ में अचल दीदी की पालना में रहकर उन्होंने आध्यात्मिक जीवन को अपनाया और आगे चलकर पंजाब ज़ोन में मीडिया विंग के जोनल कोऑर्डिनेटर एवं एग्जीक्यूटिव कमिटी के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।

माउंट आबू स्थित मुख्यालय में आयोजित मीडिया कॉन्फ्रेंसों में उनकी सक्रियता और सरल व्यक्तित्व सभी को प्रभावित करता था। दुबले-पतले कद-काठी के बावजूद उनका व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली था। वे मंच से दूर रहकर सेवा करना पसंद करते थे, लेकिन जब भी संचालन या अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली, उन्होंने समयबद्ध और अनुशासित ढंग से सत्रों को सफल बनाया। मीडिया कर्मियों को तनावमुक्त और सकारात्मक पत्रकारिता के लिए प्रेरित करना उनकी विशेष पहचान रही।

उनकी पार्थिव देह का अंतिम संस्कार 18 फरवरी को मोहाली के श्मशान घाट में किया गया। अंतिम यात्रा मोहाली फेस-7 सेंटर से प्रारंभ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में अनुयायी और शुभचिंतक शामिल हुए।

संस्था के महासचिव एवं मीडिया विंग के चेयरपर्सन राजयोगी बीके करुणा भाई तथा नेशनल कोऑर्डिनेटर बीके शांतनु ने उन्हें ईश्वरीय सेवा का समर्पित महारथी बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। बीके प्रेम बहन और बीके उत्तरा ने कहा कि मीडिया को रूहानियत का पाठ पढ़ाने वाले करमचंद भाई सदैव स्मरणीय रहेंगे।

आध्यात्म और मीडिया के समन्वय की दिशा में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। ऐसे समर्पित रूहानी सेवाधारी को शत-शत नमन।

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