महाशिवरात्रि पर कुट्टू का कहर: व्रत का प्रसाद बना ज़हर!

ग्रेटर नोएडा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर व्रत खोलने के लिए तैयार किए गए कुट्टू के आटे के व्यंजन कई परिवारों के लिए मुसीबत बन गए। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की तीन आवासीय सोसाइटियों में कुट्टू के आटे से बनी पूरियां, पकौड़ी और कचौड़ी खाने के बाद करीब दो सौ लोग अचानक बीमार पड़ गए। लोगों को उल्टी, चक्कर और घबराहट की शिकायत होने लगी। कुछ लोग बेहोश होकर गिर पड़े, जिससे सोसाइटियों में अफरा-तफरी मच गई।

स्थिति बिगड़ते देख बीमार लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कई बुजुर्गों की हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में रखा गया। राहत की बात यह रही कि समय पर उपचार मिलने से सभी की जान बच गई।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि कुट्टू का आटा सोसाइटी के पास स्थित एक जनरल स्टोर से खरीदा गया था। प्रशासन ने संबंधित फैक्ट्री को सील कर दिया है और आटे व तैयार व्यंजनों के नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि आटा दूषित या मिलावटी हो सकता है, जिससे फूड प्वाइजनिंग की घटना हुई।

ध्यान देने वाली बात यह है कि नवरात्र और अन्य व्रत-त्योहारों के दौरान कुट्टू के आटे से लोगों के बीमार होने की घटनाएं हर साल सामने आती हैं। हर बार सैंपल जांच और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन ठोस नतीजे शायद ही सार्वजनिक होते हैं। सवाल यह है कि आखिर मिलावटखोरी पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पाती?

त्योहारों के दौरान बाजारों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की सख्त निगरानी जरूरी है। सरकार और खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि वे नियमों को कड़ाई से लागू करें। वहीं सामाजिक और धार्मिक संगठनों को भी लोगों को जागरूक करना चाहिए।

आस्था अपनी जगह है, लेकिन स्वास्थ्य उससे भी ज्यादा जरूरी है। व्रत के दौरान उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते समय गुणवत्ता की जांच और सावधानी बेहद आवश्यक है, ताकि श्रद्धा का पर्व फिर किसी के लिए संकट न बने।

 

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