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फायर सीजन से पहले हाईटेक हुआ वन विभाग, ड्रोन और CCTV से रखी जाएगी जंगलों पर नजर

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हल्द्वानी,  गर्मी के मौसम में जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं को रोकने के लिए तराई पूर्वी वन प्रभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। 15 फरवरी से फायर सीजन की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है, जिसे देखते हुए वन विभाग ने निगरानी और बचाव व्यवस्थाओं को मजबूत कर दिया है। मुख्यालय स्तर पर 13 फरवरी को मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, ताकि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इस वर्ष वन विभाग ने तकनीक का सहारा लेते हुए जंगलों की निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग करने का निर्णय लिया है। ड्रोन संचालन के लिए विशेष ट्रैक तैयार किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से निगरानी की जाएगी। इससे आग लगने की घटनाओं का समय रहते पता लगाया जा सकेगा और तत्काल नियंत्रण संभव होगा।

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कुमाऊं मंडल के सबसे बड़े वन डिवीजन में कुल 9 रेंज में 53 क्रू स्टेशन स्थापित किए गए हैं। आग पर नियंत्रण के लिए 160 फायर वॉटर टैंक और लगभग 450 वनकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 16.5 हेक्टेयर क्षेत्र में आग की रोकथाम के लिए 11 वॉच टावर बनाए गए हैं। 23 ब्लोअर मशीनें और अन्य अग्निशमन उपकरण भी तैयार रखे गए हैं।

डीएफओ तराई पूर्वी वन विभाग हिमांशु बागरी ने बताया कि फायर वाचरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनका बीमा कराया गया है। ड्यूटी के दौरान किसी वॉचर की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा, जबकि घायल होने पर निःशुल्क उपचार की व्यवस्था होगी।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जंगल में आग लगाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ वन अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के सहयोग से जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है, ताकि फायर सीजन के दौरान जंगल सुरक्षित रह सकें।

 

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