अब तक आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन केवल अंडा, मांस और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों से ही मिल सकता है। लेकिन पोषण विशेषज्ञों की मानें तो यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। शाकाहारी लोग भी प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के जरिए अपनी रोजाना की जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।
आज न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में लोग तेजी से मांसाहारी प्रोटीन के विकल्प के रूप में पौधों से मिलने वाले प्रोटीन की ओर रुख कर रहे हैं। पहले यह सोच थी कि कैल्शियम का मुख्य स्रोत केवल दूध है और प्रोटीन के लिए मीट जरूरी है, लेकिन हालिया शोध बताते हैं कि बादाम कैल्शियम का बेहतरीन विकल्प हो सकता है और अंकुरित दालों में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है।
प्लांट-बेस्ड प्रोटीन को शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है। इसके विपरीत दूध और मांसाहारी उत्पादों का अधिक सेवन कई बार स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है।
आजकल बड़ी संख्या में लोग लैक्टोज इन्टॉलरेंस से परेशान हैं। ऐसे लोगों को दूध पीने के बाद गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं मांस, अंडा और रेड मीट जैसे प्रोटीन स्रोतों में कोलेस्ट्रॉल अधिक होता है, जो शरीर में खराब वसा को बढ़ा सकता है। इससे हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसके उलट, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता। यह शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद करता है और लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है। दालें, सोया, टोफू, अंकुरित अनाज, सूखे मेवे, बीज, हरी सब्जियां, कच्ची मूंगफली और साबुत अनाज प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार एक सामान्य व्यक्ति को अपने शरीर के वजन के बराबर ग्राम में प्रोटीन लेना चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का वजन 50 किलोग्राम है, तो उसे रोजाना करीब 50 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। मूंग दाल को अंकुरित कर सलाद बनाया जा सकता है, मूंग दाल का चीला खाया जा सकता है और टोफू को सब्जियों के साथ मिलाकर डाइट में शामिल किया जा सकता है।