देहरादून।
नर्सिंग भर्ती से जुड़ी जायज़ मांगों को लेकर चल रहा नर्सिंग कर्मियों का आंदोलन गुरुवार को **52वें दिन** में प्रवेश कर गया, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस और स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आ पाया है। राजधानी देहरादून स्थित **एकता बिहार धरना स्थल** पर नर्सिंग कर्मी आज भी शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
कड़ाके की ठंड, प्रतिकूल मौसम और लगातार उपेक्षा के बावजूद आंदोलनरत नर्सिंग कर्मियों का हौसला अभी भी कायम है। धरना दे रहे कर्मियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल रोजगार या भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की **स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों की सुरक्षा और नर्सिंग पेशे के भविष्य** से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
धरना स्थल पर मौजूद नर्सिंग कर्मियों ने बताया कि उन्होंने शुरुआत से ही संयम और शांति के साथ सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया है। इसके बावजूद 52 दिन बीत जाने के बाद भी न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी ने उनसे संवाद किया और न ही किसी जनप्रतिनिधि की ओर से ठोस आश्वासन दिया गया। इससे आंदोलनकारियों में निराशा के साथ-साथ आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।
नर्सिंग कर्मियों ने स्पष्ट किया कि वे अभी भी सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन यदि शीघ्र ही उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट और निर्णायक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे की रणनीति पर सामूहिक रूप से विचार किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका आंदोलन पूरी तरह **शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक** ही रहेगा।
धरना स्थल पर आज भी एकजुटता और शांति का माहौल देखने को मिला। नर्सिंग कर्मियों ने कहा कि सरकार की लगातार अनदेखी से उनका सब्र जवाब देने लगा है, लेकिन वे अभी भी संवाद और समाधान के रास्ते को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
आज के धरना प्रदर्शन में **नवल पुंडीर, राजेंद्र कुकरेती, प्रवेश रावत, सुभाष, मुकेश रमोला, भास्कर, लता, पपेंद्र, सुनील, पवन** सहित कई अन्य नर्सिंग कर्मी मौजूद रहे और उन्होंने एक स्वर में अपनी मांगों को दोहराया।
