“खंजर भी आस्तीन में…” मानव एकता मंच की नशिस्त में शायरी ने छू लिया दिल

रुड़की। सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था मानव एकता मंच के तत्वावधान में रुड़की में एक प्रभावशाली शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया, जिसमें शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम साहित्य, संवेदना और सामाजिक यथार्थ के सुंदर संगम के रूप में सामने आया।

नशिस्त का शुभारंभ समाजसेविका एवं सहारनपुर कांग्रेस की जिला उपाध्यक्ष डॉ. शाजिया नाज एडवोकेट द्वारा शमा रोशन कर किया गया, जबकि युवा समाजसेवी इरम उस्मानी ने फीता काटकर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।

कार्यक्रम के दौरान शायर वली विकास ने भावनात्मक शेर पढ़ते हुए कहा—
“कोई बताएं कैसे भला मुस्कुराऊं मैं,
मेरी खुशी तो मुझसे गया साल ले गया।”

नदीम अनवर ने सादगी और संतोष पर आधारित शेर से खूब वाहवाही लूटी—
“इतनी दौलत मत दो जिससे गैर जल जाएं,
मुझको सिर्फ इतना दे मेरा काम चल जाए।”

डॉ. सादिक देवबंदी का सामाजिक कटाक्ष से भरा शेर श्रोताओं के दिलों में उतर गया—
“वैसे तो रस्मों-राह निभाए हुए हैं लोग,
खंजर भी आस्तीन में छिपाए हुए हैं लोग।”

वहीं सलमान दिलकश उस्मानी और अब्दुल्ला राज देवबंदी के शेरों ने रिश्तों, खामोशी और भावनाओं की गहराई को बखूबी उकेरा।

नशिस्त की अध्यक्षता फैसल त्यागी ने की तथा संचालन सलमान दिलकश उस्मानी ने किया। मंच के अध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक मुर्तजा कुरैशी एवं सहसंयोजक वसीम मलिक ने सभी शायरों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार जताया। इस अवसर पर राशिद कमाल, जहांगीर मलिक, नौशाद उस्मानी, वाहिद अली सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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