प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को युवाओं को आत्मजागरण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम का संदेश देते हुए कठोपनिषद के एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक का उल्लेख किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यह श्लोक साझा करते हुए युवाओं को जीवन में ऊंचे लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
प्रधानमंत्री द्वारा उद्धृत श्लोक है—
“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।
क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥”
इस श्लोक का भावार्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता और आत्मबोध के लिए व्यक्ति को उठकर जागरूक होना होगा और श्रेष्ठ लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ज्ञान अर्जित करना होगा। उन्होंने कहा कि यह मार्ग आसान नहीं है, बल्कि उस्तरे की धार की तरह कठिन है, लेकिन इसी कठिन रास्ते पर चलकर व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे चुनौतियों और कठिनाइयों से घबराएं नहीं। कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, संकल्प और नवाचार राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे प्रेरक श्लोक और विचार युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं और उन्हें लक्ष्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत के युवा इन मूल्यों को अपनाकर न केवल अपने जीवन को दिशा देंगे, बल्कि देश को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।