देहरादून। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा द्वारा कांग्रेस पर इस संवेदनशील मामले के “राजनीतिकरण” का आरोप लगाए जाने पर उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने कड़े शब्दों में पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह बयान न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि धामी सरकार और भाजपा के नैतिक दिवालियापन को भी उजागर करता है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने स्पष्ट कहा कि जहां किसी बेटी की अस्मिता, इज्जत और जीवन का सवाल हो, वहां न्याय की लड़ाई लड़ना राजनीति नहीं, बल्कि इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने दो टूक कहा, “अगर अंकिता को न्याय दिलाने की मांग भाजपा को राजनीति लगती है, तो कांग्रेस ऐसी राजनीति रोज करेगी, बार-बार करेगी और सड़क से लेकर सदन तक करेगी।”
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि कांग्रेस के लिए यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक बेटी को न्याय दिलाने का सवाल है। उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जिस पार्टी ने धर्म, शहीदों की शहादत और यहां तक कि कोरोना जैसी भयावह आपदा को भी वोट की राजनीति के लिए इस्तेमाल किया हो, उसे कांग्रेस पर राजनीतिकरण का आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
गरिमा दसौनी ने याद दिलाया कि कोरोना काल में राशन किट और कोरोना किट तक पर भाजपा नेताओं की तस्वीरें छपी थीं। आपदा, मौत और पीड़ा के समय भी आत्मप्रचार नहीं रुका। उन्होंने कहा कि आज वही लोग एक बेटी की हत्या पर उठ रहे सवालों को “राजनीति” बताकर दबाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे प्रदेश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
अंकिता हत्याकांड को लेकर गरिमा मेहरा दसौनी ने धामी सरकार से कई गंभीर सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि भाजपा आज तक यह स्पष्ट क्यों नहीं कर पाई कि वीआईपी को बचाने की कोशिश क्यों हुई। तीन साल बाद अब जाकर अधिकारी यह कह रहे हैं कि वीआईपी धर्मेंद्र उर्फ प्रधान था, तो यह जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई। जांच को प्रभावित करने वाले अधिकारी कौन थे और न्याय की प्रक्रिया में देरी किसके संरक्षण में हुई?
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अंकिता को न्याय कब मिलेगा, दोषियों को सजा कब होगी और सत्ता में बैठे संरक्षकों पर कार्रवाई कब की जाएगी। गरिमा मेहरा दसौनी ने साफ कहा कि जब तक अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, उत्तराखंड कांग्रेस न चुप बैठेगी, न झुकेगी और न डरेगी।