पतंजलि द्वारा आयोजित समृद्ध ग्राम पतंजलि प्रशिक्षण केंद्र में तीन दिवसीय एकीकृत कृषि क्लस्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन आध्यात्मिक वातावरण और उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सतत, प्राकृतिक एवं बहुआयामी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सके।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 150 से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों ने आवासीय व्यवस्था के साथ सहभागिता की। अंतिम दिन कार्यक्रम की शुरुआत हवन एवं दीप प्रज्वलन से हुई, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि प्रकृति के अनुरूप खेती ही टिकाऊ विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि किसान कृषि को बहुआयामी रूप में अपनाएं तो न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।
खंड विकास अधिकारी बहादराबाद मानस मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि एकीकृत कृषि मॉडल गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाता है और रोजगार के नए अवसर सृजित करता है। वहीं, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेपाल सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव गोविंद प्रसाद शर्मा ने सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और भारत-नेपाल सहयोग पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भविष्य की आवश्यकता बताया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर, धरती का डॉक्टर प्रशिक्षण तथा एफएमसीजी उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण जैसे विषयों पर व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे आजीविका संवर्धन की दिशा में अत्यंत उपयोगी बताया।
यह कार्यक्रम न केवल किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पतंजलि की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।