एनडीए सांसदों संग प्रधानमंत्री का खास रात्रिभोज—क्यों बताया इसे सुशासन का प्रतीक?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया। बिहार विधानसभा में मिली उल्लेखनीय जीत के बाद आयोजित यह विशेष डिनर राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों रूपों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सांसद अलग-अलग समूहों में बसों के जरिए प्रधानमंत्री आवास पहुंचे।

सूत्रों के अनुसार, सांसदों को छह-सात के समूह में बैठाया गया और हर समूह के साथ एक मंत्री मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी टेबलों पर जाकर सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, उनका हालचाल पूछा और आग्रहपूर्वक भोजन कराया। इस आत्मीय व्यवहार ने पूरे कार्यक्रम को औपचारिकता से इतर एक पारिवारिक माहौल में बदल दिया।

रात्रिभोज के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि एनडीए परिवार सुशासन, राष्ट्रीय विकास और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले वर्षों में देश के विकास पथ को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।

डिनर का सबसे खास पहलू उसका मेन्यू रहा, जिसे पूरे देश की एकता और विविधता को दर्शाने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक, लगभग हर राज्य के पारंपरिक व्यंजन सांसदों को परोसे गए। आंध्र प्रदेश का पलककुरा पप्पू, काले मोती चिलगोजा पुलाव, भिंडी सांवरिया, महाराष्ट्र की मूंगफली चटनी, विभिन्न प्रकार के चावल और ज्वार की रोटी मेन्यू की विशेष आकर्षण रहीं।

राज्यवार व्यंजनों को शामिल करने का उद्देश्य सांसदों को ‘विविधता में एकता’ का संदेश देना था। यह डिनर सिर्फ राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकरूपता और क्षेत्रीय स्वादों को एक ही थाली में समेटने का प्रतीक बन गया।

इस रात्रिभोज के माध्यम से प्रधानमंत्री ने न केवल एनडीए गठबंधन के प्रति एकजुटता को मजबूत किया, बल्कि आने वाले वर्षों में साझा लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता भी पुनः अभिव्यक्त की।

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