जल्द बनेगा बहिरागतों को जमीन बेचने से रोकने का कानून

मुख्यमंत्री हिमंत ने कहा- " "अनजान लोगों" को असमीया न दें नौकरी-जमीन

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को ‘शहीद दिवस’ के अवसर पर राज्य में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन को गंभीर चुनौती बताते हुए लोगों से “अनजान लोगों” को जमीन नहीं बेचने और उन्हें कोई भी रोजगार या काम नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य में कम से कम तीन पीढ़ी से असमीया होने पर ही जमीन खरीद सकेंगे। विधानसभा में जल्द बहिरागतों को जमीन बेचने से रोकने का कानून बनाया जायेगा। अगले साल विधानसभा चुनाव के कुछ माह पहले उनके इस बयान को विपक्ष ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास बताया है।

गुवाहाटी के पश्चिम बोरागांव में नवनिर्मित ‘शहीद स्मारक क्षेत्र’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि यदि अभी भी सचेत नहीं हुए तो 2027 तक असम में असमीया मूल के लोग अल्पसंख्यक बन जाएंगे।

उन्होंने कहा, “राज्य की लगभग 40 प्रतिशत आबादी पड़ोसी देश से आए लोगों की है। इन लोगों का अर्थव्यवस्था पर भी तेजी से कब्जा बढ़ रहा है। यदि हमने अभी अपनी जमीन और रोजगार पर नियंत्रण नहीं किया तो आने वाले कुछ वर्षों में हम अपनी ही भूमि पर हाशिए पर पहुंच जाएंगे।”

मुख्यमंत्री ने जनता से निम्नलिखित खास अपीलें कीं:

– अपनी जमीन “अनजान लोगों” को किसी भी कीमत पर न बेचें, चाहे कितनी भी आर्थिक तंगी हो।
– उद्योग, व्यापार, खेती या किसी भी क्षेत्र में “अनजान लोगों” को नौकरी या काम न दें।
– अपनी कृषि योग्य भूमि पर भी इन्हें खेती के लिए न लगाएं।

सीएम सरमा ने इसे असम की संस्कृति, भाषा और पहचान बचाने का सामूहिक संकल्प बताया और कहा कि शहीद दिवस ऐसा पवित्र अवसर है जब हमें नए संकल्प लेने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को असम आंदोलन के बलिदानों की याद दिलाता रहेगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई वर्षों से जनसांख्यिकीय बदलाव, अवैध प्रवासन और स्वदेशी असमिया लोगों की जमीन-रोजगार की सुरक्षा के मुद्दे पर इसी तरह के बयान देते रहे हैं। उनके समर्थक इसे असमिया अस्मिता की रक्षा का जरूरी कदम मानते हैं, जबकि विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन इन बयानों को सांप्रदायिक नफरत फैलाने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाला करार देते रहे हैं।

इस ताजा बयान के बाद एक बार फिर राज्य में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया है, जबकि सत्ताधारी भाजपा ने इसे राज्य हित में उठाया गया मुद्दा बताया है।

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