सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
इम्फाल। मणिपुर में मई 2023 से चली आ रही जातीय हिंसा के लगभग 31 महीने बाद पहली बार कोई सकारात्मक और दिल छू लेने वाला दृश्य देखने को मिला है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक युम्नाम खेमचंद सिंह ने सोमवार को भारत-म्यांमार सीमा से सटे कुकी-बहुल चासाद (कम्जोंग जिला) और लिटन (उखरुल जिला) गांवों का दौरा किया। यह मई 2023 के बाद किसी मेइतेई नेता का कुकी इलाके में पहला दौरा है।
खेमचंद सिंह राहत शिविरों में रह रहे सैकड़ों विस्थापित कुकी परिवारों से मिले, उनकी व्यथा सुनी, गले लगाया और ढांढस बंधाया। इस दौरान स्थानीय कुकी समुदाय ने भी गर्मजोशी और बड़े दिल से उनका स्वागत किया।
विधायक ने वहाँ मौजूद लोगों से कहा:
“क्रिसमस नजदीक है। इस पावन पर्व पर हम सब मिलकर शांति की प्रार्थना करें। दुनिया में कहीं भी लोग लड़ते रहे हैं, लेकिन हमें अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक-दूसरे का हाथ थामना होगा। हम सब मणिपुर के ही बेटे-बेटियां हैं। मतभेद भले हों, लेकिन सद्भाव और विश्वास फिर से कायम करना होगा। उनका भविष्य एकता में ही सुरक्षित है।
उनके साथ गए तंग्खुल नगा नेता होपिंग्सन शिमरे और मार्क लुइथिंग ने इस कदम को “अत्यंत साहसी और ऐतिहासिक” बताया।
मार्क लुइथिंग ने कहा, “मई 2023 के बाद पहली बार कोई मेइतेई नेता हमारे गांव आया है। यह विश्वास बहाली की नई शुरुआत है।”
मणिपुर में 3 मई 2023 से शुरू हुई मेइतेई-कुकी जातीय हिंसा में अब तक 258 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और करीब 60 हजार लोग बेघर होकर राहत शिविरों में रह रहे हैं। घाटी (मेइतेई बहुल) और पहाड़ी क्षेत्र (कुकी-नागा बहुल) के बीच गहरी खाई बन गई थी। दोनों समुदायों के बीच आने-जाने पर पूरी तरह रोक थी।
हाल ही में दिल्ली में मेइतेई, कुकी और नगा विधायकों की सर्वदलीय बैठक हुई थी। उस बैठक के बाद खेमचंद सिंह का यह कदम घाटी और पहाड़ के बीच खड़ी हुई नफरत की दीवार को तोड़ने की पहली ठोस कोशिश माना जा रहा है। नेताओं को उम्मीद है कि यह अन्य नेताओं को भी इसी तरह के साहसिक कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगा।
हालाँकि चुनौतियाँ बरकरार हैं।
दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अभी भी गहरा है। मेइतेई समुदाय अनुसूचित जनजाति का दर्जा मांग रहा है, जबकि कुकी समुदाय अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग कर रहा है। भारत-म्यांमार सीमा पर म्यांमार से आ रहे शरणार्थियों को लेकर भी दोनों पक्षों में तीखे आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।