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पूर्वोत्तर की क्षेत्रीय पार्टियाँ एकजुट: ‘वन नॉर्थ ईस्ट’ मंच से उठेगी सामूहिक आवाज

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी। पूर्वोत्तर भारत की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों ने नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब में ‘वन नॉर्थ ईस्ट’ (One North East) नामक छत्र संगठन की औपचारिक घोषणा की। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय मुद्दों को एकजुट होकर राष्ट्रीय स्तर पर उठाना तथा पूर्वोत्तर को विकास और अधिकारों में उचित हिस्सा दिलाना है।

गठबंधन के प्रमुख चेहरे
– **कोनराड के. संगमा** (मेघालय के मुख्यमंत्री, नेशनल पीपुल्स पार्टी-एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष)
– प्रद्युत बिक्रम माणिक्य देवबर्मन (टिपरा मोथा के संस्थापक, त्रिपुरा)
– एमएम होनलुमो किकन (नगालैंड के मंत्री, पूर्व भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता)
– डैनियल लांग्थासा (पीपुल्स पार्टी ऑफ असम के संस्थापक)

अन्य प्रमुख नेता:
– जेम्स संग्मा (एनपीपी कार्यकारी अध्यक्ष)
– पकंगा बागे (अरुणाचल प्रदेश, एनपीपी)
– बिजॉय कुमार ह्रंग्खावल (टिपरा मोथा अध्यक्ष)

समर्थक पार्टियाँ: असम गण परिषद (अगप) तथा जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम)।

नेताओं के प्रमुख बयान
– **कोनराड संगमा**: “हम किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के विकास के लिए एकजुट हुए हैं। पूर्वोत्तर भारत का हृदय है, परिधि नहीं।”
– प्रद्युत देवबर्मन: “अलग-अलग बोलने से हमारी आवाज कमजोर पड़ती है; एकजुट होकर राष्ट्र हमें अनदेखा नहीं कर सकेगा। यह गठबंधन मेट्रो शहरों में रहने वाले पूर्वोत्तर वासियों को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व देगा।”
– एमएम होनलुमो किकन: “यह मंच आदिवासी भूमि, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा का प्रतीक है।”
– डैनियल लांग्थासा: “घुसपैठ, भूमि अधिकार और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों का सामूहिक समाधान हमारा लक्ष्य है।”

संगठनात्मक ढांचा
गठबंधन ने नौ सदस्यीय संचालन समिति गठित की है, जिसके संयोजक जेम्स संग्मा हैं। समिति 45 दिनों में संगठन का संविधान, ध्वज, संरचना तथा भावी चुनावी रणनीति तैयार करेगी। प्रत्येक राज्य का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

प्रमुख मुद्दे
1. आदिवासी भूमि अधिकारों की सशक्त सुरक्षा
2. अवैध घुसपैठ पर कड़े कानूनी प्रावधान
3. विशेष विकास पैकेज एवं बुनियादी ढांचा
4. महानगरों में पूर्वोत्तर निवासियों की सुरक्षा
5. संघीय ढांचे में क्षेत्रीय दलों की निर्णायक भूमिका

संभावित प्रभाव
विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन पूर्वोत्तर में ‘तृतीय मोर्चे’ की नींव रख सकता है। 2028 के लोकसभा चुनाव में क्षेत्र की 25 सीटों में से 15-20 पर इसका प्रभाव दिख सकता है।

जन-समर्थन
#OneNorthEast हैशटैग सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। गुवाहाटी से कोहिमा तक युवा कार्यकर्ता संदेश दे रहे हैं: “अब दिल्ली को सुनना ही होगा।”

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