गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक और सख्त कदम का संकेत दिया है। राज्य में बहुविवाह को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए जल्द ही नया कानून लाया जाएगा।
उसके अनुसार, “चाहे कोई किसी भी धर्म का हो, अगर पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह करता है, तो उसे सात साल की जेल हो सकती है।” जानकारी मिली है कि ये कदम विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और असम सरकार के नीतिगत फैसलों के आधार पर उठाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि असम में बहुविवाह को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए विधानसभा के अगले सत्र में विधेयक पेश होगा। यह कानून सभी धर्मों पर लागू होगा, जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह की छूट को भी खत्म करने का लक्ष्य है।
कानूनी आधार: भारतीय दंड संहिता की धारा 494 पहले से ही बिगमी (पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह) को अपराध मानती है, जिसमें अधिकतम सात साल की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।
हालांकि, यह मुख्य रूप से हिंदू मैरिज एक्ट के दायरे में लागू होता है। असम सरकार अब इसे सभी समुदायों के लिए समान रूप से लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
विशेषज्ञ समिति: मई 2023 में गठित एक विशेषज्ञ समिति ने बहुविवाह प्रतिबंध की कानूनी और सामाजिक व्यवहार्यता का अध्ययन किया। समिति की सिफारिशों के आधार पर यह कानून तैयार किया जा रहा है।
सरकारी कर्मचारियों पर पहले से नियम: 20 अक्टूबर 2023 को असम सरकार ने आदेश जारी किया कि सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति दूसरा विवाह नहीं कर सकते। यह असम सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1965 का हिस्सा है और इसका उल्लंघन अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करता है।
उन्होंने कहा कि बहुविवाह से सामाजिक समस्याएं, जैसे पेंशन विवाद और महिलाओं के अधिकारों का हनन, बढ़ता है। खासकर सरकारी कर्मचारियों के मामले में पहली पत्नी की सहमति के बिना दूसरा विवाह पेंशन और अन्य लाभों में जटिलताएं पैदा करता है।
अगला कदम: विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद असम देश का पहला राज्य बन सकता है, जहां सभी धर्मों के लिए बहुविवाह पर समान कानून लागू होगा।
गौरतलब है कि राज्य में बाल विवाह के खिलाफ तीसरे चरण के अभियान में असम पुलिस ने 416 लोगों को गिरफ्तार किया है। सीएम शर्मा ने कहा, “हम 2030 तक बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करेंगे।” यह POCSO एक्ट और प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट के तहत हुआ।