मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा में खरीदे स्वदेशी दीये, ‘वोकल फॉर लोकल’ का दिया संदेश!

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को अपने कुमाऊं प्रवास के दौरान स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को एक नया आयाम दिया। अपने गृह क्षेत्र खटीमा में उन्होंने ‘स्वदेशी अपनाओ’ अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की और लोगों से भी स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पारंपरिक दीये, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं और स्थानीय उत्पाद खरीदकर “वोकल फॉर लोकल” का सशक्त संदेश दिया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि दीपावली केवल प्रकाश और उत्साह का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक भी है। जब हम स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों द्वारा बनाए गए उत्पाद खरीदते हैं, तो हम किसी परिवार की मेहनत, आजीविका और उम्मीद को सम्मान देते हैं। उन्होंने कहा कि “हर दीपक जो हम स्थानीय कुम्हार से खरीदते हैं, वह किसी घर में नई रोशनी और मुस्कान लेकर आता है।”

मुख्यमंत्री ने जनता से आग्रह किया कि इस दीपावली पर स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिले और कारीगरों, महिला स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्योगों को लाभ हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में पारंपरिक शिल्प, जैविक खेती, हस्तनिर्मित वस्त्र और पहाड़ी उत्पादों का समृद्ध इतिहास है। राज्य के कारीगरों और शिल्पकारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये, बांस की सजावटी वस्तुएं, जैविक खाद्य पदार्थ और हस्तनिर्मित उपहार अब न केवल राज्य में बल्कि देश और विदेश में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

धामी ने कहा कि छोटे व्यापारियों और कारीगरों को सहयोग देना राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, “हमारी छोटी-छोटी खरीद किसी परिवार के जीवन में नई उम्मीद की किरण जगा सकती है।”

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को दीपावली, धनतेरस और भैयादूज की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व सबके जीवन में नई ऊर्जा, समृद्धि और खुशियां लेकर आए।
इस दीपावली हम सब मिलकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करें — अपने घरों को नहीं, बल्कि हर उस परिवार के घर को भी रोशन करें, जिसकी आजीविका हमारी स्वदेशी खरीद पर निर्भर है।

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