देहरादून IT पार्क भूमि आवंटन विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने वरिष्ठ कांग्रेसजनों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन को ज्ञापन सौंपकर सरकार के उस निर्णय का कड़ा विरोध किया, जिसमें आईटी पार्क की जमीन को 90 साल की लीज पर एक प्राइवेट बिल्डर को देने की मंजूरी दी गई है।
प्रीतम सिंह ने कहा कि आईटी पार्क का मूल उद्देश्य राज्य के युवाओं को रोजगार देना और आईटी उद्योग को बढ़ावा देना था, लेकिन सरकार के इस निर्णय ने उस उद्देश्य को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। ज्ञापन में बताया गया कि आईटी पार्क के दो भूखंड — R-1 (4 एकड़) और R-2 (1.5 एकड़) को RCC Developer के पक्ष में दिया गया है, जिससे आवंटन प्रक्रिया की **पारदर्शिता और निष्पक्षता** पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नारायण दत्त तिवारी ने SIDCUL की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि राज्य में वास्तविक औद्योगिक निवेश हो और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें। लेकिन अब आईटी पार्क की जमीन का उपयोग रियल एस्टेट निर्माण के लिए किया जा रहा है, जो राज्य के युवाओं के साथ अन्याय है।
प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस निर्णय की तुरंत समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि आईटी पार्क वास्तव में रोजगार सृजन का केंद्र बने, न कि रियल एस्टेट कारोबार का माध्यम। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के हितों को नजरअंदाज कर बनाई गई ऐसी नीतियाँ राज्य के भविष्य के लिए खतरा हैं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व विधायक राजकुमार, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, अजय सिंह और **मोंटी रतूड़ी** भी मौजूद रहे।
यह मामला अब उत्तराखंड में **आईटी उद्योग की नीतियों और सरकारी पारदर्शिता** पर गंभीर बहस को जन्म दे रहा है।