झुकी धामी सरकार, कांग्रेस ने कहा—“परीक्षा निरस्तीकरण जनदबाव का परिणाम”

देहरादून, 11 अक्टूबर। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा को निरस्त करने के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्णय को कांग्रेस और बेरोजगार युवाओं के दबाव का प्रतिफल करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय यह प्रमाण है कि सरकार की कथित पारदर्शिता का मुखौटा अब उतर चुका है।

गरिमा ने आरोप लगाया कि जिस सरकार ने पहले बेरोजगार युवाओं को सड़कों पर विरोध करने पर लाठियों की भेंट चढ़ाया, वही अब जनदबाव के सामने बैकफुट पर आ गई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान कांग्रेस ने तीन स्पष्ट मांगें रखीं थीं—

  1. CBI जांच केवल नाममात्र न होकर हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो।
  2. स्नातक स्तरीय परीक्षा तत्काल निरस्त कर नई तिथि घोषित की जाए।
  3. उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष गणेश मत्तोलिया को बर्खास्त किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।

गरिमा ने कहा कि मुख्यमंत्री की उन पाँच विधायकों के साथ दिखावटी बैठक केवल राजनीतिक नाटक था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार यह दिखाना चाहती थी कि निर्णय उनकी संवेदनशीलता से लिया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि यह निर्णय विपक्ष और युवाओं के प्रचंड जनदबाव का परिणाम है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री का परीक्षा पेपर लीक को “नकल जिहाद” कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से अपील की कि अब सभी दोषियों पर कार्रवाई की जाए, CBI जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और भर्ती प्रणाली को पारदर्शी एवं स्वायत्त निकाय को सौंपा जाए।

गरिमा मेहरा ने कहा कि भाजपा प्रचंड बहुमत की सरकार होने के बावजूद बार-बार युवाओं के सवालों पर नतमस्तक होती दिखती है। कांग्रेस पार्टी अब युवाओं की आवाज़ बनकर इस लड़ाई को पूरी निष्पक्ष जांच और दोषियों की सजा तक जारी रखेगी।

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