अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में धमाकों की गूंज से हड़कंप मच गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कैंपों को निशाना बनाते हुए एयर स्ट्राइक की। यह हमला ऐसे समय हुआ जब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत के अपने पहले उच्च-स्तरीय दौरे पर हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि पाकिस्तान नई दिल्ली और काबुल की बढ़ती कूटनीतिक नजदीकियों से चिंतित है।
सूत्रों के अनुसार, शाहिद अब्दुल हक चौक के पास हुए इस हवाई हमले का उद्देश्य TTP प्रमुख नूर वली मेहसूद को मारना था, जिन्होंने 2018 में संगठन की कमान संभाली थी। हालांकि, मेहसूद ने एक ऑडियो संदेश जारी कर कहा कि वह सुरक्षित हैं और उनके मरने या लापता होने की खबरें गलत हैं। मेहसूद ने 9/11 हमलों के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के बढ़ते रिश्तों को विश्वासघात बताया था, जिसके बाद वह इस्लामाबाद के लिए हमेशा परेशानी का कारण बने रहे। TTP ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार पाकिस्तान में सैन्य और सुरक्षाकर्मियों पर हमले किए हैं। 8 अक्टूबर को हुए हालिया हमले में अफगान सीमा के पास 11 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे।
पूर्व अमेरिकी राजदूत ज़ल्मे खलीलज़ाद ने इस हवाई हमले को “भारी वृद्धि” बताया और पाकिस्तान-तालिबान बातचीत की अपील की। इस हमले ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान ने इस स्ट्राइक का समय जानबूझकर चुना ताकि तालिबान और भारत दोनों को संदेश भेजा जा सके। तालिबान के विदेश मंत्री मुत्तकी भारत में छह दिन के दौरे पर हैं, जिसमें वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे। यह दौरा अगस्त 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण के बाद भारत और काबुल के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में चेतावनी दी थी कि देश की धरती पर हमले करने वाले आतंकवादी अफगान क्षेत्र का उपयोग कर रहे हैं और अब “बहुत हो चुका है।” ऐसे में यह एयर स्ट्राइक पाकिस्तान की नाराजगी और काबुल के बढ़ते भारत संपर्क का संकेत मानी जा रही है।
इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय कूटनीति, सुरक्षा और अफगान-भारत- पाकिस्तान संबंधों में नई तनावपूर्ण परिस्थितियों को जन्म दिया है।