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गाजा युद्धविराम के बीच ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम — ईरानी तेल सौदे पर अमेरिका का प्रहार

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वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार में सहयोग देने के आरोप में चीन की कई कंपनियों सहित करीब 100 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा 9 अक्टूबर को की गई, जो ईरान पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, चीन की शानडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप कंपनी — जो शानडोंग प्रांत की एक स्वतंत्र रिफाइनरी है — ने 2023 से अब तक लाखों बैरल ईरानी तेल खरीदे हैं। इसी कारण कंपनी को प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। साथ ही, **रिजाओ शिहुआ क्रूड ऑयल टर्मिनल कंपनी** को भी निशाने पर लिया गया है, जो लानशान पोर्ट पर तेल टर्मिनल संचालित करती है। बताया गया है कि इस टर्मिनल ने ईरान की “**शैडो फ्लीट**” के कई जहाजों — जैसे *Kongm*, *Big Mag* और *Voy* — से तेल उतारा है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि **ईरान अपने तेल नेटवर्क से अर्जित धन** का उपयोग **परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को बढ़ावा देने** तथा **मध्य पूर्व के उग्रवादी संगठनों को वित्तीय सहायता देने** में करता है। हालांकि, **ईरान का दावा** है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह **शांतिपूर्ण उद्देश्यों** के लिए है।

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अमेरिकी ट्रेजरी सचिव **स्कॉट बेसेंट** ने कहा कि “हम ईरान की ऊर्जा निर्यात प्रणाली के प्रमुख हिस्सों को ध्वस्त करके उसके नकदी प्रवाह को कमजोर कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि यह चौथी बार है जब **चीन स्थित रिफाइनरियों** पर इस तरह की कार्रवाई की गई है।

इसके अलावा, **विदेश विभाग** ने पहली बार चीन की एक अन्य कंपनी **जियांगयिन फॉरएवरसन केमिकल लॉजिस्टिक्स** पर भी ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल उत्पाद प्राप्त करने के आरोप में प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम ऐसे समय आया है जब इजराइल और हमास के बीच गाजा युद्धविराम और बंधक सौदे की घोषणा हुई है — जिससे पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें जगी हैं।

चीन और ईरान दोनों ने इस अमेरिकी कदम पर **कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है।

 

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