देहरादून। देहरादून में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शहर और राज्य के कई जन संगठन, महिला संगठन, पर्यावरणविद तथा विपक्षी दल लंबे समय से इस परियोजना को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि इस परियोजना से दसियों हज़ार लोग बेघर हो सकते हैं, वहीं प्रदूषण और तापमान में वृद्धि के साथ शहर की नदियों—रिस्पना और बिंदाल—का भी विनाश होगा।
विरोधियों का मानना है कि मसूरी और आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही पर्यटन के दबाव से जाम और पर्यावरण संकट की स्थिति बनी रहती है। यदि यह परियोजना लागू हुई तो वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ेगा, जिससे देहरादून की समस्याएँ और गंभीर हो जाएँगी।
आंदोलनकारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने “जन सुनवाइयों” को केवल औपचारिकता निभाने के लिए आयोजित किया और जनता की आपत्तियों को अनसुना कर दिया। यही कारण है कि बीते तीन वर्षों से उठ रही आवाज़ों को अभी तक कोई सुनवाई नहीं मिली।
इसी क्रम में, 21 सितंबर को देहरादून में एक विशाल जुलूस निकाला जाएगा। इस दौरान आंदोलनकारी न सिर्फ एलिवेटेड रोड परियोजना को रद्द करने की मांग करेंगे, बल्कि शहर में जनपक्षीय विकास की दिशा में ठोस कदम उठाने की भी मांग रखेंगे। इनमें प्रमुख मांगें हैं—सार्वजनिक परिवहन की क्षमता 50% तक बढ़ाना, महिलाओं के लिए बस टिकट मुफ्त करना, शहरी रोज़गार गारंटी लागू करना, किफायती आवास का निर्माण, निजी स्कूलों और मॉल्स को परिवहन व्यवस्था अनिवार्य करना, और सिग्नलों व चौकों का सुधार करना।
आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि 21 सितंबर का जुलूस इस संघर्ष की केवल शुरुआत है। आंदोलन को लगातार आगे बढ़ाया जाएगा और पूरे शहर में आवाज़ बुलंद की जाएगी, जब तक कि इस “विनाशकारी और नाजायज़ परियोजना” को पूरी तरह रद्द नहीं किया जाता।
प्रेस वार्ता को चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत और विमला कोहली, CPI के राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य समर भंडारी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. एस.एन. सचान, वरिष्ठ पर्यावरणविद डॉ. रवि चोपड़ा, उत्तराखंड सर्वोदय मंडल के हरबीर सिंह कुशवाहा, मैड के विवेक गुप्ता और उत्तराखंड इंसानियत मंच के पी.एस. कक्कड़ ने संबोधित किया।