राष्ट्रीय विज्ञान क्विज 2025: 15 विश्वविद्यालयों के छात्रों ने दिखाई प्रतिभा

देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) और डीएनए लैब्स क्रिस के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार, 13 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय विज्ञान क्विज 2025 का सफल आयोजन यूकॉस्ट के विमर्श सभागार में हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अंकिता सिंह (डिप्टी डायरेक्टर एवं क्वालिटी मैनेजर, NABL) के स्वागत भाषण से हुई। इस अवसर पर यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह राणा ने बताया कि महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के मार्गदर्शन में यूकॉस्ट लगातार राज्य के विभिन्न जनपदों, विशेषकर सीमांत क्षेत्रों में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। वहीं, डीएनए लैब्स क्रिस के प्रबंध निदेशक एवं वैज्ञानिक डॉ. नरोत्तम शर्मा ने कार्यक्रम का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत करते हुए छात्र-प्रतिभागियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की ओर प्रेरित किया।

इस प्रतियोगिता में देशभर के 15 विश्वविद्यालयों से 80 से अधिक स्नातक एवं परास्नातक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता कुल पाँच रोचक राउंड्स में संपन्न हुई।

  • Mark Your Fate: सामान्य विज्ञान व चिकित्सा विषयों पर आधारित MCQ राउंड।
  • Atomic Gestures: फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी आदि से प्रश्न।
  • Fastest Finger First: 50 प्रश्नों का त्वरित बज़र राउंड।
  • Rapid Fire: व्यक्तिगत आधार पर ‘Do or Die’ शैली की प्रश्नोत्तरी।
  • If You Know, You Know: निर्णायक फाइनल राउंड।

आयोजन के दौरान डॉ. अंकिता सिंह, श्री प्रोहित जुमनानी, श्री रितिक डोगरा और श्री दर्शान अम्बिगा ने विभिन्न राउंड्स का सफल संचालन किया। प्रतिभागियों ने अपनी वैज्ञानिक समझ, त्वरित निर्णय क्षमता और टीम भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता में इशिता (मणिपाल विश्वविद्यालय) ने प्रथम स्थान, बीना (एसबीएस विश्वविद्यालय) ने द्वितीय स्थान और प्रियांशु (सीआईएमएस कॉलेज) ने तृतीय स्थान हासिल किया।

समापन सत्र में श्री विपिन नौटियाल (सेक्शन इंचार्ज, पैथोलॉजी) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने इस आयोजन को छात्रों के लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताते हुए विज्ञान और अनुसंधान के प्रति बढ़ती रुचि का स्वागत किया।

यह राष्ट्रीय स्तर की क्विज़ न केवल प्रतिभाओं को परखने का मंच बनी, बल्कि युवाओं में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और नवाचार की भावना को भी मजबूत करने में मील का पत्थर साबित हुई।

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