रुड़की। नव सृजन साहित्यिक संस्था (रजिस्टर्ड) रुड़की के तत्वाधान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन संस्था के कोषाध्यक्ष पंकज त्यागी ‘असीम’ के निवास पर किया गया।
उन्होंने व उनके बड़े भाई नीरज त्यागी ने मिलकर अपने स्वर्गीय पिता ओमप्रकाश त्यागी तथा स्वर्गीय माता श्रीमती शांति त्यागी की पुण्य स्मृति में यह कार्यक्रम नगर के वयोवृद्ध वरिष्ठ साहित्यकार नरेश राजवंशी की अध्यक्षता में किया। मुख्य अतिथि उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा के निदेशक डॉक्टर आनंद भारद्वाज और विशिष्ट अतिथि वी के जैन रहे।
किसलय क्रांतिकारी के संचालन में माॅं सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन करके व माॅं सरस्वती तथा स्वर्गीय ओमप्रकाश त्यागी एवं स्वर्गीय श्रीमती शांति देवी के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद काव्य गोष्ठी का शुभारंभ संस्था के समन्वयक सुरेंद्र कुमार सैनी की सरस्वती वंदना से हुआ। श्रीमती अर्चना त्यागी ने ‘जब मैं थक जाती हूॅं,डर जाती हूॅं,तब मैं माॅं को ढूंढती हूॅं ‘ को पढ़ा तो सुरेंद्र कुमार सैनी की ग़ज़ल ‘पिता का फ़र्ज़ जैसे अंगुली पर गिरि उठा लेना/ जरा तुम ग़ौर से देखो है उसमें अंश गिरधर का’ को भरपूर समर्थन मिला। डॉक्टर आनंद भारद्वाज ने कहा, ‘ मैं माॅं से अपनी सभी भूलों, गलतियों और धृष्टताओं के लिए क्षमा मांगना चाहता हूॅं ,पर क्या करूं आज मेरे पास माॅं नहीं है’ को सुनकर माहौल भावुक हो गया। संस्था के वरिष्ठ संरक्षक सुबोध पुंडीर सरित् की शिव वंदना सराही गई, ग़ज़लकार कृष्ण सुकुमार ने जब अपनी ग़ज़लें प्रस्तुत की तो लोग वाही- वाही करने पर मजबूर हो गए। मेज़बान शायर पंकज त्यागी ‘असीम’ की ग़ज़ल ‘ सब मुश्किलों की राह में दीवार थे पिता/ दो- चार बार ही नहीं हर बार थे पिता’ को काफी सराहना मिली। संस्था अध्यक्ष डॉक्टर शालिनी जोशी पंत ने अपनी मार्मिक रचना’ सपनों के पाॅंखों संग चिड़िया को तो उड़ना है/ नए-नए शाखों के दानों को चुगना है’ सुनाई तो गोष्ठी में बैठे सभी सदस्यों की आंखें नम हो गई।विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के उपकुलपति डॉ श्रीगोपाल नारसन ने स्वर्गीय ओम प्रकाश त्यागी व श्रीमती शांति त्यागी के प्रति श्रद्धाभाव सन्देश भेजकर उन्हें कर्मयोगी युगल बताया। इस काव्य गोष्ठी में अनुपमा गुप्ता, नवीन शरण निश्चल, मुकेश वशिष्ठ, सौ सिंह सैनी एवं रामवीर सिंह ने भी अपनी कविताएं सुनाई। इस अवसर पर श्रीमती सुनीता,गीता एवं सविता ने अपने माता-पिता के भावुक संस्मरणों को सभी के साथ साझा किया। अध्यक्षता कर रहे नरेश राजवंशी की माॅं को समर्पित कविता ‘मुसीबत जब भी आती है तो माॅं ही याद आती है’ की भी प्रशंसा हुई। इस कार्यक्रम में सुधीर त्यागी, शुभी, अक्षदा, अंशुल, ध्रुव, रजनीश त्यागी, निखिल पंत तथा श्याम कुमार त्यागी आदि मौजूद रहे।