Dehradun: उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान पारित हुए **लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक** पर लोकतंत्र सेनानी संघ के सदस्यों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है। इस विधेयक के पारित होने से इमरजेंसी के दौरान जेल जाने वाले सेनानियों और उनके परिवारों को आखिरकार आधिकारिक मान्यता और सम्मान मिला है।
आपातकाल के समय महीनों जेल में रहे प्रेम बड़ाकोटी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी और उनकी पूरी टीम ने यह साहसिक व न्यायपूर्ण कदम उठाकर इतिहास को सही मायनों में जीवंत कर दिया है। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद सरकार ने इस विषय को गंभीरता से स्वीकार किया और मान्यता दी। बड़ाकोटी ने कहा कि इस अवसर पर उन सभी दिवंगत सेनानियों को भी याद करना जरूरी है जिन्होंने आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानी केवल राजनीतिक योद्धा नहीं, बल्कि समाजसेवी भी हैं, जिनका जीवन समाज कल्याण और देशहित के लिए समर्पित रहा है। उनके अनुसार यह विधेयक उनके संघर्षों का सम्मान है।
लोकतंत्र सेनानी संघ के अन्य सदस्यों ने भी सरकार का आभार जताया। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल **भगत सिंह कोश्यारी** ने भी इस निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के दौरान जेल गए सेनानियों को अब वास्तविक सम्मान मिला है।
विजय स्नेही, पुनीत लाल ढींगरा, कृष्ण कुमार अग्रवाल सहित कई अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी मुख्यमंत्री धामी का आभार प्रकट किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह सम्मान उन योद्धाओं को समर्पित है जिन्होंने देश का लोकतंत्र बचाया। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता बचाने के लिए जनसंघ के नेताओं और अन्य लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में ठूंसा और उन्हें यातनाएं दीं। धामी ने कहा कि वह दौर देश के लोकतंत्र का काला अध्याय था, लेकिन आज उन योद्धाओं को सम्मान देकर उत्तराखंड सरकार खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही है।