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रेलवे ट्रैक पर सोलर पैनल लगाकर भारत ने रचा नया इतिहास

नई दिल्ली। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) ने इतिहास रच दिया है। बरेका ने पहली बार रेलवे ट्रैक पर चलने लायक सोलर पैनल लगाकर भारत को दुनिया का तीसरा देश बना दिया है। इससे पहले स्विट्जरलैंड और जर्मनी ने ही यह तकनीक अपनाई थी। फिलहाल यह प्रोजेक्ट पायलट स्तर पर चल रहा है और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा।

बरेका के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के अनुसार, इन सोलर पैनलों को विशेष तकनीक से तैयार किया गया है। इन्हें ट्रैक के बीच रबर पैड और एपॉक्सी गोंद की मदद से लगाया गया है। खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर इन्हें सिर्फ 90 मिनट में हटाकर दोबारा लगाया जा सकता है, जिससे ट्रैक के रखरखाव में कोई दिक्कत नहीं होगी। हर पैनल का वजन लगभग 32 किलो है और आकार 2.2 मीटर × 1.1 मीटर है।

भारत का पहला हटाया जा सकने वाला 15 किलोवाट का सोलर पैनल सिस्टम बरेका में एक्टिव ट्रैक पर लगाया गया है। इससे पहले यहां 3859 किलोवॉट पीक क्षमता वाला सोलर प्लांट पहले से काम कर रहा है, जो हर साल लगभग 42 लाख यूनिट ग्रीन एनर्जी पैदा करता है।

साल 1956 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बरेका की नींव रखी थी। शुरुआत में यहां डीजल इंजन बनाए जाते थे, लेकिन 2016 के बाद सरकार की इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव नीति के तहत इलेक्ट्रिक इंजन बनने लगे। अब तक 2538 इलेक्ट्रिक इंजन और कुल 10,860 इंजन (डीजल, इलेक्ट्रिक और अन्य) यहां बन चुके हैं।

बरेका ने उत्पादन और एक्सपोर्ट दोनों में रिकॉर्ड कायम किए हैं। अभी तक 11 देशों को 174 इंजन निर्यात हो चुके हैं और मोजाम्बिक के लिए नए इंजनों की डिलीवरी जारी है।

पर्यावरण संरक्षण में भी बरेका अग्रणी है। यहां 12 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, 3 एमएलडी औद्योगिक अपशिष्ट संयंत्र और 29 डीप वेल ग्राउंड वॉटर रिचार्ज सिस्टम स्थापित हैं। साथ ही बायो फर्टिलाइजर प्लांट से जैविक खाद भी तैयार की जाती है।

बरेका का यह प्रयोग भारत को न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि रेलवे के पर्यावरण-हितैषी भविष्य की ओर एक बड़ा कदम साबित होगा।

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