उत्तराखंड में “लोकतंत्र खतरे में”? कांग्रेस का निर्वाचन आयोग पर बड़ा हमला

उत्तराखंड में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज़ हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को राजभवन जाकर राज्यपाल लेफ्टीनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को बर्खास्त करने और राज्य सरकार को कानून व्यवस्था सुधारने के निर्देश देने की मांग की।
कांग्रेस ने हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनावों में भारी धांधली और सत्ताधारी पार्टी द्वारा की गई गुंडागर्दी के आरोप लगाए। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझ कर पंचायत चुनावों में देरी की ताकि शहरी मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में भी मतदान कर सकें। साथ ही, आरक्षण प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर सत्ता पक्ष के लोगों को फायदा पहुंचाया गया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बेतालघाट और रुद्रप्रयाग में जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण और खुलेआम फायरिंग जैसी घटनाएं सामने आईं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। हरिश रावत ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार की कठपुतली की तरह काम किया और चुनावों में निष्पक्षता का पालन नहीं किया। उन्होंने बताया कि आयोग ने ऐसे उम्मीदवारों को नामांकन की अनुमति दी जिनके नाम दो जगह दर्ज थे, जबकि हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।
पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह और विधायक क़ाज़ी निजामुद्दीन ने भी आरक्षण में गड़बड़ियों की ओर इशारा किया और राज्यपाल से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बचाने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से सख्त हस्तक्षेप की अपील की है।

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